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ओम का जप और ध्यान

 ओम का जप और ध्यान दोनों ही लाभकारी हैं, पर दोनों अलग-अलग स्तर पर काम करते हैं। एक को दूसरे से बेहतर कहना सही नहीं होगा, क्योंकि एक दूसरे की सीढ़ी है। 1. ओम का जप क्या करता है? जप यानी ओम को आवाज के साथ, धीरे-धीरे या मन ही मन दोहराना। कैसे काम करता है: यह मन को एक ही बिंदु पर बांध देता है। जब आप लगातार ओम बोलते हैं, तो दिमाग के बाकी हजार विचार अपने आप शांत होने लगते हैं। लाभ: • मन तुरंत शांत और स्थिर होता है, घबराहट और गुस्सा कम होता है • सांस की लय ठीक होती है, शरीर में कंपन से नर्वस सिस्टम रिलैक्स होता है • जिसका मन बहुत भटकता है, उसके लिए शुरुआत करने का सबसे आसान तरीका है  जप एक सक्रिय अभ्यास है, आप कुछ कर रहे हैं। 2. ओम का ध्यान क्या करता है? ध्यान में आप ओम का जप बंद करके, सिर्फ ओम के अर्थ, उसके कंपन या उसके बाद बची हुई शांति पर टिक जाते हैं। यहाँ बोलना नहीं है, सिर्फ सुनना और होना है। कैसे काम करता है: जप से मन जब तैयार हो जाता है, तब ध्यान में आप साक्षी बन जाते हैं। लाभ: • गहरे स्तर का तनाव, पुरानी थकान निकलती है • आत्म-बोध, एकाग्रता और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है • ...

ओम का जप और ध्यान

 ओम का जप और ध्यान दोनों ही लाभकारी हैं, पर दोनों अलग-अलग स्तर पर काम करते हैं। एक को दूसरे से बेहतर कहना सही नहीं होगा, क्योंकि एक दूसरे की सीढ़ी है। 1. ओम का जप क्या करता है? जप यानी ओम को आवाज के साथ, धीरे-धीरे या मन ही मन दोहराना। कैसे काम करता है: यह मन को एक ही बिंदु पर बांध देता है। जब आप लगातार ओम बोलते हैं, तो दिमाग के बाकी हजार विचार अपने आप शांत होने लगते हैं। लाभ: • मन तुरंत शांत और स्थिर होता है, घबराहट और गुस्सा कम होता है • सांस की लय ठीक होती है, शरीर में कंपन से नर्वस सिस्टम रिलैक्स होता है • जिसका मन बहुत भटकता है, उसके लिए शुरुआत करने का सबसे आसान तरीका है  जप एक सक्रिय अभ्यास है, आप कुछ कर रहे हैं। 2. ओम का ध्यान क्या करता है? ध्यान में आप ओम का जप बंद करके, सिर्फ ओम के अर्थ, उसके कंपन या उसके बाद बची हुई शांति पर टिक जाते हैं। यहाँ बोलना नहीं है, सिर्फ सुनना और होना है। कैसे काम करता है: जप से मन जब तैयार हो जाता है, तब ध्यान में आप साक्षी बन जाते हैं। लाभ: • गहरे स्तर का तनाव, पुरानी थकान निकलती है • आत्म-बोध, एकाग्रता और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है • ...

विषय=परमात्मा के अतिरिक्त किसी अन्य को परमात्मा का प्रतीक मान लेना ,उसको पूजना मूर्खता है?*

 *"मूर्खस्य नास्ति औषधम्*" *विषय=परमात्मा के अतिरिक्त किसी अन्य को परमात्मा का प्रतीक मान लेना ,उसको पूजना मूर्खता है?* मित्रों, आजकल भक्ति का एक नया दौर चल रहा है,लगभग  50 साल पूर्व इस प्रकार को  शुरुआत ओशो ने की और तरह तरह के संगीत के साथ नाचने को  ध्यान ,भक्ति का नाम दिया। इसी कड़ी में आगे जुड़ गए इस्कॉन ,इन्होंने कृष्ण कृष्ण की धुनों के साथ उछल कूद को ही असली भक्ति,ईश्वर उपासना , प्रार्थना करार दे दिया । फिर श्री श्री 1008 रविशंकर और अन्य धर्मगुरु क्यों पीछे रहते , उन्होंने भी गोपाला गोपाला ,राधे राधे आदि की संगीत की धुनों पर  नाचने के लिए प्रेरित किया ,इसको भक्ति बता दिया स्वयं भी मैदान में आकर भक्तों का उत्साहवर्धन किया। राधा कृष्ण के नाच गाने वालों का तो कहना ही क्या अनगिनत है।आजकल भागवत कथा सुनाने वाले पंडित भी कथा के बीच में महिला  श्रोताओं के नाचने का आनंद लेते है। मुस्लिम समाज में भी ,खासतौर पर सूफी संगीत भी जोर जोर से सिर हिलाने ,बालों को बिखेरकर उछाल कूद को भक्ति कहते   है, जिसमें हिंदू भी अल्ला हु अल्ला हु पर नाचते हैं। इसके अलावा मा...

भला किसी का कर ना सको तो, बुरा किसी का मत करना पुष्प नहीं बन सकते तो तुम, काँटे बन कर मत रहना

 🙏 *आज का वैदिक भजन* 🙏 00124 भला किसी का कर ना सको तो,  बुरा किसी का मत करना पुष्प नहीं बन सकते तो तुम, काँटे बन कर मत रहना _बन ना सको भगवान् अगर तुम,_ *(1)* कम से कम इंसान बनो _नहीं कभी शैतान बनो तुम,_ *(2)*  नहीं कभी हैवान बनो सदाचार अपना न सको तो,  पापों में पग मत धरना पुष्प नहीं बन सकते तो तुम, काँटे बन कर मत रहना सत्य वचन ना बोल सको तो,  झूठ कभी भी मत बोलो मौन रहो तो ही अच्छा,  कम से कम विष तो मत घोलो बोलो यदि पहले तुम तोलो,  फिर मुँह को खोला करना पुष्प नहीं बन सकते तो तुम,  काँटे बन कर मत रहना घर ना किसी का बसा सको तो,  झोपड़ियाँ ना जला देना मरहम पट्टी कर ना सको तो,  घाव नमक ना लगा देना दीपक बन कर जल ना सको तो, अँधियारा भी मत करना  पुष्प नहीं बन सकते तो तुम,  काँटे बन कर मत रहना सच्चाई की राह में बेशक  कष्ट अनेकों मिलते हैं  पर काँटों के बीच में देखो  फूल हमेशा खिलते हैं  सूरज की भाँति खुद जल कर  सब जग को रोशन करना  पुष्प नहीं बन सकते तो तुम,  काँटे बन कर मत रहना भला किसी का कर ना सको त...

हो जायें बन्द आँखें प्रभु ध्यान करते करते

 🙏 *आज का वैदिक भजन* 🙏 00123   ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म्  ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म्  हो जायें बन्द आँखें  प्रभु ध्यान करते करते  अमृत बहाये वाणी  गुण गान करते करते हो जायें बन्द आँखें  प्रभु ध्यान करते करते  ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म्  ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म्  अपना मैं आप खो दूँ  तन की भी सुध रहे ना  हृदय रिझायें प्रभु को  मधु पान करते करते  हो जायें बन्द आँखें  प्रभु ध्यान करते करते  ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म्  ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म्  सत्य भाव की तरंगे  अन्तराल से निकले  हो जायें मौन मन भी  तेरा मान करते करते  हो जायें बन्द आँखें  प्रभु ध्यान करते करते  ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म्  ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म्  चित्त में रहे स्मृति  प्रभु नाम की रटन हो  हर्षाये मेरा अङ्ग अङ्ग  नव ज्ञान भरते भरते  हो जायें बन्द आँखें  प्रभु ध्यान करते करते  ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म्  ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म्  दिव्य ज्योति हो निराली...

परिवार व अन्य किसी स्नेही व्यक्ति का संबंध हम से अचानक छूट सकता है”

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 ओ३म् “परिवार व अन्य किसी स्नेही व्यक्ति का संबंध हम से अचानक छूट सकता है” ========= मनुष्य सामाजिक प्राणी है। समाज में हम जिन लोगों से परिचित हैं वह सभी वर्तमान में अपनी-अपनी आयु के किसी चरण या सोपान पर है। मनुष्य की भी एक औसत आयु है तथा इसी प्रकार से अन्य प्राणियों की भी अधिकतम आयु होती है। मनुष्य की अधिकतम आयु एक सौ वर्ष या अपवादों में इससे कुछ अधिक होकर लगभग 125 वर्ष तक हो सकती है। बहुत से लोग तो 50 से 70 के मध्य ही काल कवलित हो जाते हैं। जब हम अपने परिवार के सदस्यों के साथ रहते हैं तो हमें कभी इस बात का ध्यान नहीं होता कि हममें से अचानक परिवार के सदस्य का हमसे वियोग हो सकता है। ऐसा होता है कि कुछ लोग लम्बी अवधि तक रुग्ण रहें और उसके बाद उनकी मृत्यु हो और ऐसा भी देखा जाता है कि कभी अचानक ही कुछ शारीरिक विकृति व रोग आ जाता है और देखते ही देखते कुछ दिनों या महीनों में किसी सदस्य का प्राणान्त हो जाता है। हम ऋषि दयानन्द का जीवन देखते हैं तो बाल्यकाल में ही उनकी एक बहिन को अचानक हैजा होता है और वह उसी दिन कुछ घंटों बाद काल कवलित हो जाती है। इसके बाद उनके चाचा जी अचानक काल कवलित हो ज...

चन्द्रशेखर आजाद देश के महान बलिदानी एवं युवाओं के प्रेरक हैं

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 ओ३म् “चन्द्रशेखर आजाद देश के महान बलिदानी एवं युवाओं के प्रेरक हैं” ============= शहीद चन्द्रशेखर आजाद जी का जन्म २३ जुलाई १९०६ को तथा बलिदान २७ फरवरी १९३१ को हुआ था। वह भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के क्रान्तिकारी व स्वतंत्रता सेनानी थे। चन्द्रशेखर जी शहीद राम प्रसाद बिस्मिल व शहीद भगत सिंह के समान क्रान्तिकारियों के प्रमुख मित्रों व साथियों में से थे। सन् १९२२ में गाँधीजी द्वारा असहयोग आन्दोलन को अचानक बन्द कर देने के कारण उनकी विचारधारा में बदलाव आया और वे क्रान्तिकारी गतिविधियों से जुड़ कर हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के सक्रिय सदस्य बन गये। इस संस्था के माध्यम से उन्होंने ऋषि दयानन्द के भक्त एवं क्रान्तिकारी राम प्रसाद बिस्मिल जी के नेतृत्व में पहले ९ अगस्त १९२५ को काकोरी काण्ड किया और फरार हो गये। इसके पश्चात् सन् १९२७ में बिस्मिल जी के साथ ४ प्रमुख साथियों के बलिदान के बाद उन्होंने उत्तर भारत की सभी क्रान्तिकारी पार्टियों को मिलाकर एक करते हुए हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन का गठन किया तथा भगत सिंह के साथ लाहौर में लाला लाजपत राय की मौत का बदला सॉण्डर्स की हत्या करक...

आइए श्री कृष्ण के महान चरित्र को जानकर हम भी अपने जीवन मे अपनाने का संकल्प लें।

 *श्रीकृष्ण*  (जन्माष्टमी पर विशेष)     आइए श्री कृष्ण के महान चरित्र को जानकर हम भी अपने जीवन मे अपनाने का संकल्प लें। *श्रीकृष्ण का महान व्यक्तित्व* *१.जुए के विरोधी:-* वे जुए के घोर विरोधी थे। जुए को एक बहुत ही बुरा व्यसन मानते थे। जब वे काम्यक वन में युधिष्ठिर से मिले तो उन्होनें युधिष्ठिर को कहा- *आगच्छेयमहं द्यूतमनाहूतोsपि कौरवैः।* *वारयेयमहं द्यूतं दोषान् प्रदर्शयन्।।* -(वनपर्व १३/१-२) अर्थ:-हे राजन्! यदि मैं पहले द्वारका में या उसके निकट होता तो आप इस भारी संकट में न पड़ते। मैं कौरवों के बिना बुलाये ही उस द्यूत-सभा में जाता और जुए के अनेक दोष दिखाकर उसे रोकने की पूरी चेष्टा करता। *२. मदिरा(शराब) के विरोधी:-* वे मदिरापान के घोर विरोधी थे। उन्होंने यादवों के मदिरापान पर प्रतिबन्ध लगा दिया था और उसका सेवन करने वाले के लिए मृत्युदण्ड की व्यवस्था की थी। *अद्यप्रभृति सर्वेषु वृष्ण्यन्धककुलेष्विह।* *सुरासवो न कर्त्तव्यः सर्वैर्नगरवासिभिः।।*  मौसलपर्व *यश्च नोsविदितं कुर्यात्पेयं कश्चिन्नरः क्वचित्।* *जीवन् स कालमारोहेत् स्वयं कृत्वा सबान्धवः।।* -(मौसलपर्व १/२९,३...

कौन कहता रास रचैय्या थे घनश्याम

भजन : कौन कहता रास रचैय्या थे घनश्याम तर्ज : श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम 4 3 2 1 कौन कहता रास रचैय्या थे घनश्याSSSSम ..........$$$$........$$$$.......... कौन कहता रास रचैय्या थे घनश्याSSSSम ..........$$$$........$$$$.......... कौन कहता रास रचैय्या थे घनश्याम कौन कहता रास रचैय्या थे घनश्याम लोग यूँही करते श्रीकृष्ण को बदनाम लोग यूँही करते श्रीकृष्ण को बदनाम कौन कहता रास रचैय्या थे घनश्याम कौन कहता रास रचैय्या थे घनश्याम लोग यूँही करते श्रीकृष्ण को बदनाम लोग यूँही करते श्रीकृष्ण को बदनाम ..........$$$$........$$$$..........  4 3 2 1  हो SSSS योगिराज देशभक्त 'ओ३म्' के उपासक महान धर्मात्मा थे दुष्टों के संहारक ..........$$$$........$$$$..........  योगिराज देशभक्त 'ओ३म्' के उपासक महान धर्मात्मा थे दुष्टों के संहारक संध्या यज्ञ करते थे सुबह और शाम संध्या यज्ञ करते थे सुबह और शाम लोग यूँही करते श्रीकृष्ण को बदनाम लोग यूँही करते श्रीकृष्ण को बदनाम कौन कहता रास रचैय्या थे घनश्याम कौन कहता रास रचैय्या थे घनश्याम लोग यूँही करते श्रीकृष्ण को बदना...

सांवरे की बंसी तो गाये 'ओ३म्' नाम

भजन : सांवरे की बंसी तो गाये 'ओ३म्' नाम तर्ज : श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम 4 3 2 1 सांवरे की बंसी तो गाये 'ओ३म्' नाSSSम ..........$$$$........$$$$.......... कन्हैया की बंसी तो गाये 'ओ३म्' नाSSSम ..........$$$$........$$$$.......... वेदों वाला श्याम वो तो वेदों वाला श्याम कन्हैया की बंसी तो गाये 'ओ३म्' नाम लोग करे माधव को यूँही बदनाम लोग करे किशन को यूँही बदनाम सांवरे की बंसी तो गाये 'ओ३म्' नाम कन्हैया की बंसी तो गाये 'ओ३म्' नाम वेदों वाला श्याम वो तो वेदों वाला श्याम वेदों वाला श्याम वो तो वेदों वाला श्याम ..........$$$$........$$$$..........  4 3 2 1  हो SSSS वेद ज्ञान पढके हमें दिया विशुद्ध ज्ञान गीता आज कल के कथा वाचक कर रहे फजीता ..........$$$$........$$$$..........  वेद ज्ञान पढके हमें दिया विशुद्ध ज्ञान गीता आज कल के कथा वाचक कर रहे फजीता चोर जार शिखामणि दिया कैसा नाम चोर जार शिखामणि दिया कैसा नाम लोग करे माधव को यूँही बदनाम लोग करे किशन को यूँही बदनाम सांवरे की बंसी तो गाये 'ओ३म्' ना...

प्रभु नाम के साबुन से जो, मन का मैल छुड़ाएगा। निर्मल मन के दर्पण में वह, प्रभु का दर्शन पाएगा॥

  प्रभु नाम के साबुन से जो, मन का मैल छुड़ाएगा। निर्मल मन के दर्पण में वह, प्रभु का दर्शन पाएगा॥ नर शरीर अनमोल रे प्राणी, प्रभु कृपा से पाया है। झूठे जग प्रपंच में पड़ कर, क्यों प्रभु को बिसराया है। समय हाथ से निकल गया तो, समय हाथ से निकल गया तो, सिर धुन धुन पछताएगा। निर्मल मन के दर्पण में वह, प्रभु का दर्शन पाएगा॥  झूठ कपट निंदा को त्यागो, हर प्राणी से प्यार करो। घर पर आये अतिथि कोई तो, यथाशक्ति सत्कार करो। क्यों, पता नहीं किस रूप में आकर, पता नहीं किस रूप में आकर, नारायण मिल जाएगा। निर्मल मन के दर्पण में वह, प्रभु का दर्शन पाएगा॥  साधन तेरा कच्चा है, जब तक प्रभु पर विश्वास नहीं, मंजिल कर पाना है क्या, जब दीपक में प्रकाश नहीं। निश्चय है तो भवसागर से, निश्चय है तो भवसागर से, बेड़ा पार हो जाएगा। निर्मल मन के दर्पण में वह, प्रभु का दर्शन पाएगा॥  दौलत का अभिमान है झूठा, यह तो आनी जानी है। राजा रंक अनेक हुए, कितनों की सुनी कहानी है। ॐ नाम प्रिय महामंत्र ही, ॐ नाम प्रिय महामंत्र ही, साथ तुम्हारे जाएगा। निर्मल मन के दर्पण में वह, प्रभ...

आज के अरबपति और स्वयंभू गुरु चाहते हैं कि हिन्दू विचार शून्य बना रहे । इसी कारण हिन्दू युवा नास्तिक हो रहा है ।

 *विचारशून्य हिन्दू* आज के अरबपति और स्वयंभू गुरु चाहते हैं कि हिन्दू विचार शून्य बना रहे । इसी कारण हिन्दू युवा नास्तिक हो रहा है ।  नौकरी चाहिए, व्यापार चाहिए, किसी को संतान चाहिए, तो किसी को बीमारी से छुटकारा । जो हाथ से गया और जो पास में है, वह बचा रहे उसके लिए भी बाबाओं से मन्त्र चाहिए ।  अंधश्रद्धा की पराकाष्ठा देखिये । नौजवान बेटियों को अकेले इनके आयोजनों तक में भेजने से लोग नहीं हिचकते ।  सड़क पर हाथ की सफाई दिखाने वाला मदारी और मंच पर हाथ की सफाई दिखाने वाला जादूगर है । परंतु धर्म का चोला पहन कर हाथ की सफाई दिखाने वाला सत्य साई बाबा के नाम से पूजा जाता है और १ लाख करोड़ से अधिक की सम्पत्ति इकठ्ठा करता है । परिणाम -  # पॉल दिनाकरण प्रार्थना की ताकत से भक्तों को शारीरिक समस्याओं व दूसरी समस्याओं से छुटकारा दिलाने का दावा करते हैं । वे जिसके लिए भगवान से प्रार्थना करते हैं, उससे मोटी रकम भी वसूलते हैं ।  उदाहरण ३००० रुपये में आप अपने बच्चों व परिवार के लिए प्रार्थना करवा सकते हैं । पॉल दिनाकरन, जो कि एक ईसाई प्रेरक हैं, उनकी संपत्ति ५००० करोड़ से ज्यादा...

आर्य समाज के मंत्री की जिम्मेदारियां*

नमस्ते जी  *आर्य समाज के मंत्री की जिम्मेदारियां*  आर्य समाज में मंत्री का पद बहुत महत्वपूर्ण होता है। मंत्री ही पूरी सभा की कार्य-प्रणाली को चलाता है।  आर्य समाज नियमों के अनुसार मंत्री की मुख्य जिम्मेदारियां ये हैं: *1. प्रशासनिक जिम्मेदारियां* - *सभा की बैठकें बुलाना*: साप्ताहिक, मासिक और वार्षिक बैठक की सूचना देना, एजेंडा बनाना और कार्यवाही लिखना - *रिकॉर्ड रखना*: सदस्यता रजिस्टर, बैठक की कार्यवाही, आय-व्यय का हिसाब, पत्र-व्यवहार का पूरा लेखा-जोखा रखना - *नियमों का पालन करवाना*: आर्य समाज के 10 नियमों और उप-नियमों के अनुसार सभा को चलाना *2. धार्मिक और प्रचार की जिम्मेदारियां* - *वैदिक प्रचार*: वेद, सत्यार्थ प्रकाश और ऋषि दयानंद के सिद्धांतों का प्रचार करना - *यज्ञ-हवन करवाना*: रोजाना संध्या-हवन, पूर्णिमा यज्ञ, संस्कार आदि की व्यवस्था करना - *संस्कार संपन्न करवाना*: नामकरण, विवाह, उपनयन आदि 16 संस्कारों को वैदिक विधि से करवाना - *व्याख्यान और सत्संग*: सप्ताह में प्रवचन, कक्षा और वैदिक पाठशाला की व्यवस्था करना *3. आर्थिक जिम्मेदारियां* - *चंदा और दान एकत्र करना*: समाज क...

क्या शिवजी को गांजा पीते हुए चित्रित करना सही है?

 क्या शिवजी को गांजा पीते हुए चित्रित करना सही है? हिन्दू समाज में शिवजी भगवान को कैलाशपति, नीलकंठ आदि नामों से सम्बोधित किया जाता है। नीचे एक चित्र दिया गया है। जिसमें पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शिवजी गांजा का सेवन करते हुए दिखाए गए है।- वेदों में शिव ईश्वर का एक नाम है जिसका अर्थ कल्याणकारी है एवं एक नाम रूद्र है जिसका अर्थ दुष्ट कर्मों को करने वालो को रुलाने वाला है। वेदों में एक ईश्वर के अनेक नाम गुणों के आधार पर बताये गए हैं। ऐसे में ईश्वर के शिव नामक नाम के आधार पर एक पात्र की कल्पना करना जो गांजा जैसे नशे को ग्रहण करता है। यह अज्ञानता का प्रतीक मात्र है। इसी अज्ञानता में शिव रात्रि के दिन शिव मन्दिरों में प्रसाद के रूप में भांग पिलाई जाती है और पुरूष स्त्रियाँ जिन्होंने कभी नशा न किया हो वे भांग का सेवन श्रद्धा से करते हैं इन ग़लत परंपराओं के चलते समाज को धर्म के नाम पर नशेड़ी बनाने का कार्य हो रहा है। सावन के महीने में कावड़ यात्रा पिछले कुछ वर्षों से विशेष रूप से प्रचलित हो गई है। कावड़ लाने वाले शिव की घुट्टी कहकर भांग/गांजा आदि का सेवन करते है। इसे कुछ लोग नशा सेवन को धार...

आर्य समाज मंदिर मानपुर गयाजी का चुनाव

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  आर्य समाज मंदिर मानपुर गयाजी का चुनाव  विशेष रूप से आमंत्रित नरेश चन्द्र आर्य, चुनाव पदाधिकारी, अशोक आर्य चुनाव पर्यवेक्षक, एवं आचार्य संजय सत्यार्थी की उपस्थिति में शांतिपूर्ण माहौल में सम्पन्न हुआ। चुनाव के परिणामों की घोषणा भी कर दी गयी। सर्वसम्मति से विनोद कुमार आर्य आर्यसमाज मानपुर के प्रधान, जय प्रकाश आर्य मंत्री, राज किशोर प्रसाद कोषाध्यक्ष एवं प्यारचंद कुमार मोहन अंकेक्षक पद के लिए चुन लिए गये हैं। उप प्रधान के रूप में सुषमा आर्या एवं शीला आर्या तथा उप मंत्री के रूप में किरण आर्या एवं इन्द्र देव दिवाकीर्ति को दायित्व सौंपे गये हैं। आर्य वीर दल के अधिष्ठाता के रूप में प्रेम कुमार आर्य का चयन किया गया है। आर्यसमाज मानपुर के संरक्षक के रूप में बच्चू लाल आर्य एवं सत्येन्द्र कुमार आर्य अपनी भूमिका निभाएंगे। नव निर्वाचित सभी पदाधिकारियों ने आर्य समाज मंदिर, मानपुर, गया के विकास के लिए तन, मन, और धन से मिलकर कार्य करने का शपथ लिया। इस अवसर पर उपस्थित आर्यसमाज की वरिष्ठ सदस्या दुर्गेश नंदिनी, प्रतिभा आर्या सहित उपस्थित समस्त आर्यसमाज मानपुर परिवार ने हर्ष जताते हुए नव निर्वा...

दुनिया बनाने वाले, महिमा तेरी निराली चन्दा बनाया शीतल, सूरज में आग डाली

 *आज का वैदिक भजन* दुनिया बनाने वाले, महिमा तेरी निराली चन्दा बनाया शीतल, सूरज में आग डाली ऊँचे शिखर गिरी के, आकाश चूमते हैं वृक्षों के झुरमुटे भी, वायु में झूमते हैं सरिताऐं बहती कल-कल, निर्मल से नीर वाली चन्दा बनाया शीतल, सूरज में आग डाली दुनिया बनाने वाले फूलों का चूस कर रस, कैसा मधु बनाये मधुमक्खी में भी तूने, क्या यंत्र है लगाये मधु सबके मन को भाये, लाला हो चाहे लाली चन्दा बनाया शीतल, सूरज में आग डाली दुनिया बनाने वाले पत्तों को खा के कीड़ा, रेशम बना रहा है है कौन जो उदर में, चरखा चला रहा है बुन-बुन के आ रहा है, रेशम का लच्छा जाली चन्दा बनाया शीतल, सूरज में आग डाली दुनिया बनाने वाले बरसात के दिनों में, लेंटर टपकते देखा बयें के घोंसले में, पायी न जल की रेखा क्या तकनीकी सिखाई, तूने ओ जग के वाली चन्दा बनाया शीतल, सूरज में आग डाली दुनिया बनाने वाले जुगनू की दुम में तूने, क्या बल्ब है लगाया बरसात की निशा में, जंगल है जगमगाया पक्षी चकोर के क्या, आँखों में कशिश डाली चन्दा बनाया शीतल, सूरज में आग डाली दुनिया बनाने वाले मोरों के पंख देखो, क्या विचित्र चित्रकारी कोयल बनाई काली, आवाज प्या...

तेरे दर को छोड़ कर, किस दर जाऊँ मैं सुनता मेरी कौन है, किसे सुनाऊँ मैं

 *आज का वैदिक भजन* तेरे दर को छोड़ कर, किस दर जाऊँ मैं सुनता मेरी कौन है, किसे सुनाऊँ मैं याद भुलाई तेरी जब से, लाखों कष्ट उठाये हैं क्या जानूँ जीवन में मैंने, कितने पाप कमाये हैं हूँ शर्मिन्दा आपसे, क्या बतलाऊँ मैं तेरे दर को छोड़ कर, किस दर जाऊँ मैं मेरे पाप कर्म ही तुझसे, प्रीति न करने देते हैं कभी जो चाहूँ मिलूँ आपसे, रोक मुझे ये देते हैं कैसे स्वामी आपके दर्शन पाऊँ मैं तेरे दर को छोड़ कर, किस दर जाऊँ मैं तू है नाथ वरों का दाता, तुझसे वर सब पाते हैं ऋषि मुनि और योगी सारे, तेरे ही गुण गाते हैं छींटा दे दो ज्ञान का, होश में आऊँ मैं तेरे दर को छोड़ कर, किस दर जाऊँ मैं जो बीती सो बीती लेकिन, बाकी उमर सम्भालूँ मैं प्रेम पाश में बन्धा आपके, गीत प्रेम के गा लूँ मैं जीवन अपने आप का, सफल बना लूँ मैं  सुनता मेरी कौन है, किसे सुनाऊँ मैं तेरे दर को छोड़ कर, किस दर जाऊँ मैं

आठ प्रकार के कसाई

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                     आठ प्रकार के कसाई अनुमन्ता विशसिता निहन्ता क्रयविक्रयी। संस्कर्ता चोपहर्ता च खादकश्चेति घातकाः॥ *अनुमन्ता*  - पशु  को मारने की आज्ञा देने वाला । *विशसिता* - मांस को काटने वाला । *निहन्ता*    - पशु को मारने वाला । *क्रेता*        - पशु को मारने के लिए खरीदने वाला । *विक्रेता*    - पशु को मारने के लिए बेचने वाला ।  *संस्कर्ता*   - पकाने वाला । *उपहृर्ता*    - परोसने वाला । *खादक:*   - खाने वाला । ये सभी        - *कसाई , हत्यारे, और पापी हैं ।* *सभी की मानसिकता और विचारो का अलग अलग होना स्वाभाविक है*  *क्योंकि कोई मांस खाने वाला है , कोई अंडे खाने वाला है ओर कोई सब्ज़ियाँ खाने वाला है* *और खाने का निश्चित रूप से हमारी इंद्रियो पर विशेष प्रभाव पढ़ता है मुख्यता: मन पर*  *जैसा खाओ अन्न , वैसा रहे मन ओर जिसका जैसा अन्न रहेगा उसका वैसा मन रहेगा , वैसे ही विचार रहेंगे वैसे ही स्वभाव रहेगा*  *और एक और बा...

वर्तमान समय में आर्य समाज का उद्देश्य क्या है?

 वर्तमान समय में आर्य समाज का उद्देश्य वही है जो महर्षि दयानन्द सरस्वती ने 1875 में रखा था, पर उसके रूप आज की समस्याओं के अनुसार अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। आर्य समाज कोई नया मत या पंथ नहीं है, यह वेदों के आधार पर समाज सुधार का आंदोलन है। आर्य समाज के 10 नियमों पर आधारित वर्तमान के 5 मुख्य उद्देश्य 1. वेदों का प्रचार और पाखंड का खंडन - आज भी मुख्य उद्देश्य अंधविश्वास, पाखंड, मूर्तिपूजा, फलित ज्योतिष, जातिवाद और चमत्कार के नाम पर हो रहे शोषण को वेद, तर्क और विज्ञान के प्रकाश में दूर करना है। 2. सामाजिक समानता और जाति-भेद का नाश - जन्म से नहीं, कर्म और गुण से वर्ण व्यवस्था मानना। इसी उद्देश्य से अंतर्जातीय विवाह, विधवा विवाह, और दलित-वंचित वर्ग को यज्ञोपवीत देकर मुख्यधारा में लाने का कार्य आर्य समाज आज भी कर रहा है। 3. शिक्षा और चरित्र निर्माण - DAV स्कूल-कॉलेज, गुरुकुल, कन्या गुरुकुल के माध्यम से आधुनिक शिक्षा के साथ वैदिक संस्कार देना। आज के समय में नशा, मोबाइल की लत और संस्कारहीनता के विरुद्ध युवाओं में चरित्र-निर्माण इसका बड़ा उद्देश्य है। 4. राष्ट्रभक्ति और हिंदी / स्वदेशी का प्रच...

हम समाज और राष्ट्र के लिए उपयोगी बनें

   🔥व्यक्ति की प्रतिष्ठा का आकलन उसके जीवन- मूल्यों से किया जाता है। जीवन-मूल्य सफलता के लिए जरूरी हैं। हममें से बहुत से लोग उन्ही जीवन मूल्यों का पालन करते हैं जो हमें हमारे पूर्वजों से मिलते हैं या फिर हम श्रेष्ठ जनों का अनुसरण कर अपने जीवन मूल्य का स्वयं निर्धारण करते हैं। जहां तक संभव होता है हम उन आदर्शो की ओर चलने की कोशिश भी करते हैं। लेकिन कभी ऐसे अवसर भी आते हैं जब हम मात्र दूसरों को खुश करने के लिये या फिर किसी अन्य स्वार्थवश अपने मूल्यों को बदल देते हैं। यदि हम सिर्फ आदर्शो की बातें करें किन्तु उन्हें अपने आचरण में न लागू करें तो हम मूल्यहीन ही कहे जाएंगे। जीवन मूल्य हमारे दिन प्रतिदिन के व्यवहार में झलकने चाहिए हमारी वाणी में दिखनी चाहिए। हमारे आचरण से प्रदर्शित होने चाहिए। याद रखें, जो व्यक्ति मूल्यहीन जीवन जीते हैं वे समाज के लिए बोझ माने जाते हैं। निठल्ले व्यक्ति समाज का कभी भी मार्ग-दर्शन नहीं करते।    मनुष्य मस्तिष्क, हृदय और भावना से युक्त प्राणी है। वेद, उपनिषद भी हमे यही संदेश देते हैं कि व्यक्ति सत्य के प्रति आग्रही, सत्यनिष्ठ और जीवन मूल्यों को...

धन तेरा हुआ बर्बाद,अरे नादान क्यों पीता है।

 *धुन : हम भूल गये रे हर बात...* *धन तेरा हुआ बर्बाद,अरे नादान क्यों पीता है।* *बुद्धि का बिगड़ा साज,अरे नादान क्यों पीता है।।टेक।।* *तुझ से पहले भी अनेकों ही,इस मय सागर में डूब गये।*  *कितनों ने जीवन खो ही दिया,कितने फांसी पर झूल गये।।*  *तेरा तन था कभी फौलाद,अरे नादान क्यों पीता है।।१।।*  *हैं मात पिता बूढ़े तेरे,कभी उनकी तरफ देखा ही नहीं।*  *अन्दर ही अन्दर रोते हैं,सुख-दुख की कभी पूछा ही नहीं।।* *कर माॅं के दूध को याद,अरे नादान को पीता है।।२।।*  *बेटी तेरी ये कहती है,मैंने जनम लिया क्यों इस घर में।*  *हे परमपिता क्यों भूल गये,क्यों भेज दिया है इस घर में।।*  *सुन बेटी की फरियाद,अरे नादान क्यों पीता है।।३।।*  *कोई पी न सका इस बोतल को,पर ये सब को पी जाती है।* *जब बोतल ने पी तुझको लिया,तब याद प्रभु की आती है।।*  *'मूलचन्द' तू कर धन्यवाद,अरे नादान क्यों पीता है।।४।।*