प्रभु सारी दुनियाँ से ऊँची तेरी शान है। कितना महान् है तू कितना महान् है।

 ईश महिमा प्रभु सारी दुनियाँ से ऊँची तेरी शान है।  कितना महान् है तू कितना महान् है। यहाँ वहाँ कोने-कोने तू ही मशहूर है।  निकट से निकट और दूर से भी दूर है।  'तुझमें समाया हुआ सकल जहान है।' कितना महान् है तू कितना महान् है ...... तू ही एक मालिक है सारी कायनात का।  फूलों भरी क्यारियों का तारों की जमात का।  तेरी ही जमीन है यह तेरा आसमान है। कितना महान् है तू कितना महान् है. सबने जो रंक देखे सभी तेरे रंग हैं।  जग में अनेक तेरे पालने के ढंग हैं।  तुझको तो छोटे-बड़े सबका ही ध्यान है। कितना महान् है तू कितना महान् है. जितने भी दुनियाँ में जीव देहधारी हैं।  सभी तेरे प्यार के समान अधिकारी हैं।  'पथिक' सभी को दिया तूने वरदान है। कितना महान् है तू कितना महान् है

कर्मों की जंजीर न तोड़ी, प्यार प्रभु का तोड़ दिया। मोहमाया में अंधा बनकर, पाप से नाता जोड़ लिया।


 कर्मों की जंजीर न तोड़ी, प्यार प्रभु का तोड़ दिया। 

मोहमाया में अंधा बनकर, पाप से नाता जोड़ लिया।

कर्मों की जंजीर न तोड़ी................................


आया था तू इस दुनिया में, जीवन ज्योति जलाने को, 

तजकर आया झूठे धंधे, प्रभु के दर्शन पाने को। 

पर पग तेरे नहीं उठते हैं, प्रभु के दर तक जाने को। 

प्रभु भक्ति को दिल से भुलाकर, सच्चा रास्ता छोड़ दिया।।1।।

कर्मों की जंजीर न तोड़ी................................


गई जवानी आया बुढ़ापा, अब क्यों बैठा रोता है, 

बीत गई सो जाने दे अब, शेष बची क्यों खोता है।

सफल है जग में जीवन उसका, धर्म के बीज जो बोता है,

 गंदे कर्मों में फँसकर, अनमोल जन्म क्यों खो दिया।।2।।

कर्मों की जंजीर न तोड़ी................................


शाम-सवेरे हरदम दिल में, रहती तेरे माया है, 

सोना-चाँदी देख-देखकर, डोली तेरी काया है।

मोह अज्ञान का घोर अँधेरा, तेरे तन पर छाया है, 

होके दीवाना इस दुनिया में, प्रभु से मुखड़ा मोड़ लिया।।3।।

कर्मों की जंजीर न तोड़ी................................







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