मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया

 मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया देने वाले ने दिया, वो भी दिया किस शान से मेरा है ये लेने वाला, कह उठा अभिमान से मैं - मेरा यह कहने वाला, मन किसी का है दिया मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया जो मिला है वो हमेशा, पास रह सकता नहीं कब बिछुड़ जाये ये कोई, राज कह सकता नहीं जिन्दगानी का खिला, मधुवन किसी का है दिया मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया जग की सेवा, खोज अपनी, प्रीति उनसे कीजिये जिन्दगी का राज है ये, जान कर जी लीजिये साधना की राह पर, साधन किसी का है दिया मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया

कर्मों की जंजीर न तोड़ी, प्यार प्रभु का तोड़ दिया। मोहमाया में अंधा बनकर, पाप से नाता जोड़ लिया।


 कर्मों की जंजीर न तोड़ी, प्यार प्रभु का तोड़ दिया। 

मोहमाया में अंधा बनकर, पाप से नाता जोड़ लिया।

कर्मों की जंजीर न तोड़ी................................


आया था तू इस दुनिया में, जीवन ज्योति जलाने को, 

तजकर आया झूठे धंधे, प्रभु के दर्शन पाने को। 

पर पग तेरे नहीं उठते हैं, प्रभु के दर तक जाने को। 

प्रभु भक्ति को दिल से भुलाकर, सच्चा रास्ता छोड़ दिया।।1।।

कर्मों की जंजीर न तोड़ी................................


गई जवानी आया बुढ़ापा, अब क्यों बैठा रोता है, 

बीत गई सो जाने दे अब, शेष बची क्यों खोता है।

सफल है जग में जीवन उसका, धर्म के बीज जो बोता है,

 गंदे कर्मों में फँसकर, अनमोल जन्म क्यों खो दिया।।2।।

कर्मों की जंजीर न तोड़ी................................


शाम-सवेरे हरदम दिल में, रहती तेरे माया है, 

सोना-चाँदी देख-देखकर, डोली तेरी काया है।

मोह अज्ञान का घोर अँधेरा, तेरे तन पर छाया है, 

होके दीवाना इस दुनिया में, प्रभु से मुखड़ा मोड़ लिया।।3।।

कर्मों की जंजीर न तोड़ी................................







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