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सत्याचरण ही सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है

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  ।।सत्याचरण ही सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है।। आचार्य श्री प्रेम आर्य, वैदिक पुरोहित, गया जी, 9304366018 ओ३म् व्रतेन दीक्षामाप्नोति दीक्षयाप्नोति दक्षिणाम्।            दक्षिणा श्रद्धामाप्नोति श्रद्धाया सत्यमाप्यते।।                                          य०अ०- १९,मं०-३०  भावार्थ-           (व्रतेन) जो मनुष्य सत्य के आचरण को दृढ़ता से करता है, तब वह दीक्षा अर्थात उत्तम अधिकार के फल को प्राप्त करता है।(दीक्षयाप्नोति०) जब मनुष्य उत्तम गुणों से युक्त होता है, तब सब लोग सब प्रकार से उसका सत्कार करते हैं। क्योंकि धर्म आदि शुभ गुणों से ही उस दक्षिणा को मनुष्य प्राप्त होता है, अन्यथा नहीं।(दक्षिणा श्र०) जब ब्रह्मचर्य आदि सत्यव्रतों से अपना और दूसरे मनुष्यों का अत्यंत सत्कार होता है, तब उसी में दृढ़ विश्वास होता है। क्योंकि सत्य धर्म का आचरण ही मनुष्यों का सत्कार करने वाला है।(श्रद्धया) फिर सत्य के आचरण में जितनी जितनी अधिक ...

मनचाही संतान* की परमौषधि है - *"ब्रह्मचर्य

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  *"मनचाही संतान* की परमौषधि है - *"ब्रह्मचर्य"*  यदि मनचाही सन्तान चाहते हैं, तो मन, वचन और शरीर से सर्वावस्था में ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करें । ब्रह्मचर्य ही वह औषधि है, जिसके पालन से कुल की संस्कार तथा राष्ट्रोन्नति के योग्य सन्तानों को जन्म दिया जा सकता है |   ब्रह्मचर्य से ही मनुष्यों में दिव्य गुणों को निर्माण होता है | मनवाञ्छित सन्तान प्राप्ति के लिए योगेश्वर श्रीकृष्ण एक अद्वितीय उदाहरण हैं | वेद कहता है - "मनुर्भव जनया दैव्यं जनम ।"          अर्थात् मनुष्य बनो । "मननातिति मनुष्यः ।"           विचार कर विवेक से कर्म करने के कारण मनुष्य कहाता है । और दिव्य अर्थात् उत्तमोत्तम गुणों को प्राप्त करें तथा उत्तरोत्तर गुणों से युक्त सन्तानों को जन्म दें ।  परन्तु, यह भी ध्यान रखें । "जो दिव्य गुणों से हीन, असंयमी, व्यभिचारी अर्थात् ब्रह्मचर्यहीन सन्तानों को जन्म देते हैं, वह स्वयं ही लम्पट, अजितेन्द्रिय, वासना के कामी कीडे़ और पशुओं से भी निकृष्ट होते हैं, उनकी सन्तानें, सन्तानें नहीं अपितु एक दुर्घटना होती है ...

गुस्से को नियंत्रित करने का एक सुंदर उदाहरण

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 गुस्से को नियंत्रित करने का एक सुंदर उदाहरण एक वकील ने सुनाया हुआ एक ह्यदयस्पर्शी किस्सा "मै अपने चेंबर में बैठा हुआ था, एक आदमी दनदनाता हुआ अन्दर घुसा हाथ में कागज़ो का बंडल, धूप में काला हुआ चेहरा, बढ़ी हुई दाढ़ी, सफेद कपड़े जिनमें पांयचों के पास मिट्टी लगी थी उसने कहा, "उसके पूरे फ्लैट पर स्टे लगाना है बताइए, क्या क्या कागज और चाहिए... क्या लगेगा खर्चा... " मैंने उन्हें बैठने का कहा, "रग्घू, पानी दे इधर" मैंने आवाज़ लगाई वो कुर्सी पर बैठे उनके सारे कागजात मैंने देखे उनसे सारी जानकारी ली आधा पौना घंटा गुजर गया "मै इन कागज़ो को देख लेता हूं आपकी केस पर विचार करेंगे आप ऐसा कीजिए, बाबा, शनिवार को मिलिए मुझसे" चार दिन बाद वो फिर से आए वैसे ही कपड़े बहुत डेस्परेट लग रहे थे अपने भाई पर गुस्सा थे बहुत मैंने उन्हें बैठने का कहा वो बैठे ऑफिस में अजीब सी खामोशी गूंज रही थी मैंने बात की शुरवात की " बाबा, मैंने आपके सारे पेपर्स देख लिए आप दोनों भाई, एक बहन मा बाप बचपन में ही गुजर गए तुम नौवीं पास। छोटा भाई इंजिनियर आपने कहा कि छोटे भाई की पढ़ाई के लिए आपन...