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मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया

 मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया देने वाले ने दिया, वो भी दिया किस शान से मेरा है ये लेने वाला, कह उठा अभिमान से मैं - मेरा यह कहने वाला, मन किसी का है दिया मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया जो मिला है वो हमेशा, पास रह सकता नहीं कब बिछुड़ जाये ये कोई, राज कह सकता नहीं जिन्दगानी का खिला, मधुवन किसी का है दिया मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया जग की सेवा, खोज अपनी, प्रीति उनसे कीजिये जिन्दगी का राज है ये, जान कर जी लीजिये साधना की राह पर, साधन किसी का है दिया मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया

मनचाही संतान* की परमौषधि है - *"ब्रह्मचर्य

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  *"मनचाही संतान* की परमौषधि है - *"ब्रह्मचर्य"*  यदि मनचाही सन्तान चाहते हैं, तो मन, वचन और शरीर से सर्वावस्था में ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करें । ब्रह्मचर्य ही वह औषधि है, जिसके पालन से कुल की संस्कार तथा राष्ट्रोन्नति के योग्य सन्तानों को जन्म दिया जा सकता है |   ब्रह्मचर्य से ही मनुष्यों में दिव्य गुणों को निर्माण होता है | मनवाञ्छित सन्तान प्राप्ति के लिए योगेश्वर श्रीकृष्ण एक अद्वितीय उदाहरण हैं | वेद कहता है - "मनुर्भव जनया दैव्यं जनम ।"          अर्थात् मनुष्य बनो । "मननातिति मनुष्यः ।"           विचार कर विवेक से कर्म करने के कारण मनुष्य कहाता है । और दिव्य अर्थात् उत्तमोत्तम गुणों को प्राप्त करें तथा उत्तरोत्तर गुणों से युक्त सन्तानों को जन्म दें ।  परन्तु, यह भी ध्यान रखें । "जो दिव्य गुणों से हीन, असंयमी, व्यभिचारी अर्थात् ब्रह्मचर्यहीन सन्तानों को जन्म देते हैं, वह स्वयं ही लम्पट, अजितेन्द्रिय, वासना के कामी कीडे़ और पशुओं से भी निकृष्ट होते हैं, उनकी सन्तानें, सन्तानें नहीं अपितु एक दुर्घटना होती है ...

गुस्से को नियंत्रित करने का एक सुंदर उदाहरण

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 गुस्से को नियंत्रित करने का एक सुंदर उदाहरण एक वकील ने सुनाया हुआ एक ह्यदयस्पर्शी किस्सा "मै अपने चेंबर में बैठा हुआ था, एक आदमी दनदनाता हुआ अन्दर घुसा हाथ में कागज़ो का बंडल, धूप में काला हुआ चेहरा, बढ़ी हुई दाढ़ी, सफेद कपड़े जिनमें पांयचों के पास मिट्टी लगी थी उसने कहा, "उसके पूरे फ्लैट पर स्टे लगाना है बताइए, क्या क्या कागज और चाहिए... क्या लगेगा खर्चा... " मैंने उन्हें बैठने का कहा, "रग्घू, पानी दे इधर" मैंने आवाज़ लगाई वो कुर्सी पर बैठे उनके सारे कागजात मैंने देखे उनसे सारी जानकारी ली आधा पौना घंटा गुजर गया "मै इन कागज़ो को देख लेता हूं आपकी केस पर विचार करेंगे आप ऐसा कीजिए, बाबा, शनिवार को मिलिए मुझसे" चार दिन बाद वो फिर से आए वैसे ही कपड़े बहुत डेस्परेट लग रहे थे अपने भाई पर गुस्सा थे बहुत मैंने उन्हें बैठने का कहा वो बैठे ऑफिस में अजीब सी खामोशी गूंज रही थी मैंने बात की शुरवात की " बाबा, मैंने आपके सारे पेपर्स देख लिए आप दोनों भाई, एक बहन मा बाप बचपन में ही गुजर गए तुम नौवीं पास। छोटा भाई इंजिनियर आपने कहा कि छोटे भाई की पढ़ाई के लिए आपन...