धन तेरा हुआ बर्बाद,अरे नादान क्यों पीता है।

 *धुन : हम भूल गये रे हर बात...* *धन तेरा हुआ बर्बाद,अरे नादान क्यों पीता है।* *बुद्धि का बिगड़ा साज,अरे नादान क्यों पीता है।।टेक।।* *तुझ से पहले भी अनेकों ही,इस मय सागर में डूब गये।*  *कितनों ने जीवन खो ही दिया,कितने फांसी पर झूल गये।।*  *तेरा तन था कभी फौलाद,अरे नादान क्यों पीता है।।१।।*  *हैं मात पिता बूढ़े तेरे,कभी उनकी तरफ देखा ही नहीं।*  *अन्दर ही अन्दर रोते हैं,सुख-दुख की कभी पूछा ही नहीं।।* *कर माॅं के दूध को याद,अरे नादान को पीता है।।२।।*  *बेटी तेरी ये कहती है,मैंने जनम लिया क्यों इस घर में।*  *हे परमपिता क्यों भूल गये,क्यों भेज दिया है इस घर में।।*  *सुन बेटी की फरियाद,अरे नादान क्यों पीता है।।३।।*  *कोई पी न सका इस बोतल को,पर ये सब को पी जाती है।* *जब बोतल ने पी तुझको लिया,तब याद प्रभु की आती है।।*  *'मूलचन्द' तू कर धन्यवाद,अरे नादान क्यों पीता है।।४।।*

प्रभु सारी दुनियाँ से ऊँची तेरी शान है। कितना महान् है तू कितना महान् है।

 ईश महिमा


प्रभु सारी दुनियाँ से ऊँची तेरी शान है। 

कितना महान् है तू कितना महान् है।


यहाँ वहाँ कोने-कोने तू ही मशहूर है। 

निकट से निकट और दूर से भी दूर है।

 'तुझमें समाया हुआ सकल जहान है।'

कितना महान् है तू कितना महान् है ......


तू ही एक मालिक है सारी कायनात का। 

फूलों भरी क्यारियों का तारों की जमात का। 

तेरी ही जमीन है यह तेरा आसमान है।

कितना महान् है तू कितना महान् है.


सबने जो रंक देखे सभी तेरे रंग हैं।

 जग में अनेक तेरे पालने के ढंग हैं। 

तुझको तो छोटे-बड़े सबका ही ध्यान है।

कितना महान् है तू कितना महान् है.


जितने भी दुनियाँ में जीव देहधारी हैं।

 सभी तेरे प्यार के समान अधिकारी हैं। 

'पथिक' सभी को दिया तूने वरदान है।

कितना महान् है तू कितना महान् है



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