ईश्वर विषय
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*ईश्वर विषय*
# ईश्वर का मुख्य नाम
‘ओ३म्’ है ।
# ईश्वर के असंख्य गौणिक नाम हैं । जिससे हमें उसके गुण, कर्म और स्वभाव का पता चलता है ।
# ईश्वर एक ही है, उसके नाम अनेक हैं ।
# ईश्वर कभी जन्म नहीं लेता ।
वह अजन्मा है ।
# स्तुति, प्रार्थना, उपासना मात्र ईश्वर की ही करनी चाहिये ।
# ईश्वर से अधिक सामर्थ्यशाली और कोई नहीं है ।
वह सर्वशक्तिमान है ।
# जिसमें सबसे अधिक ऐश्वर्य होता है, उसे इन्द्र कहते हैं, अर्थात ‘इन्द्र’ ईश्वर का नाम है ।
# दुःख तीन प्रकार के होते हैं -
आध्यात्मिक, आधिभौतिक, आधिदैविक दुःख ।
# अविद्या, राग-द्वेष, रोग इत्यादि से होने वाले दुःख को,
आध्यात्मिक दुःख कहते हैं ।
# मनुष्य, पशु-पक्षी, कीट-पतंग, मक्खी-मच्छर, सांप इत्यादि से होने वाले दुःख को,
आधिभौतिक दुःख कहते हैं ।
# अधिक सर्दी, गर्मी, वर्षा, भूख, प्यास, मन की अशान्ति से होने वाले दुःख को,
आधिदैविक दुःख कहते हैं ।
# विष्णु, वरुण, परमात्मा, पिता, ब्रह्मा, महादेव, महेश, सरस्वती, शिव, गणेश आदि नाम ईश्वर के गुणवाचक हैं, इन नामों के चित्र नहीं बन सकते हैं ।
# ईश्वर के तीन गुण -
न्याय, दया और ज्ञान ।
# ईश्वर के तीन कर्म -
१) ईश्वर संसार को बनाता है ।
२) ईश्वर वेदों का उपदेश करता है ।
३) ईश्वर कर्मों का फल देता है |
# जिसका कभी अन्त नहीं होता उसे अनन्त कहते हैं ।
ईश्वर अनन्त है ।
# ‘गणेश’ ईश्वर का नाम इसलिए है, क्योंकि वह पूरे संसार का स्वामी है और सबका पालन करता है ।
# ‘सरस्वती’ ईश्वर का एक नाम है । संसार का पूर्ण ज्ञान जिसे होता है, उसे सरस्वती कहते हैं ।
# ईश्वर का कोई आकार, रुप, रंग, मूर्ति नहीं है । अतः उसे निराकार कहते हैं ।
# राहु और केतु नाम के कोई ग्रह नहीं होते हैं । ये दोनों नाम ईश्वर के हैं ।
# ईश्वर जगत को बनाता है, इसलिए उसे ब्रह्मा कहते हैं ।
# शुद्ध - राग-द्वेष, छल-कपट, झूठ इत्यादि समस्त बुराइयों से वह दूर है । उसका स्वभाव पवित्र है ।
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