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मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया

 मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया देने वाले ने दिया, वो भी दिया किस शान से मेरा है ये लेने वाला, कह उठा अभिमान से मैं - मेरा यह कहने वाला, मन किसी का है दिया मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया जो मिला है वो हमेशा, पास रह सकता नहीं कब बिछुड़ जाये ये कोई, राज कह सकता नहीं जिन्दगानी का खिला, मधुवन किसी का है दिया मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया जग की सेवा, खोज अपनी, प्रीति उनसे कीजिये जिन्दगी का राज है ये, जान कर जी लीजिये साधना की राह पर, साधन किसी का है दिया मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया

मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया

 मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया देने वाले ने दिया, वो भी दिया किस शान से मेरा है ये लेने वाला, कह उठा अभिमान से मैं - मेरा यह कहने वाला, मन किसी का है दिया मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया जो मिला है वो हमेशा, पास रह सकता नहीं कब बिछुड़ जाये ये कोई, राज कह सकता नहीं जिन्दगानी का खिला, मधुवन किसी का है दिया मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया जग की सेवा, खोज अपनी, प्रीति उनसे कीजिये जिन्दगी का राज है ये, जान कर जी लीजिये साधना की राह पर, साधन किसी का है दिया मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया

भला किसी का कर ना सको तो, बुरा किसी का मत करना पुष्प नहीं बन सकते तो तुम, काँटे बन कर मत रहना

 🙏 *आज का वैदिक भजन* 🙏 00124 भला किसी का कर ना सको तो,  बुरा किसी का मत करना पुष्प नहीं बन सकते तो तुम, काँटे बन कर मत रहना _बन ना सको भगवान् अगर तुम,_ *(1)* कम से कम इंसान बनो _नहीं कभी शैतान बनो तुम,_ *(2)*  नहीं कभी हैवान बनो सदाचार अपना न सको तो,  पापों में पग मत धरना पुष्प नहीं बन सकते तो तुम, काँटे बन कर मत रहना सत्य वचन ना बोल सको तो,  झूठ कभी भी मत बोलो मौन रहो तो ही अच्छा,  कम से कम विष तो मत घोलो बोलो यदि पहले तुम तोलो,  फिर मुँह को खोला करना पुष्प नहीं बन सकते तो तुम,  काँटे बन कर मत रहना घर ना किसी का बसा सको तो,  झोपड़ियाँ ना जला देना मरहम पट्टी कर ना सको तो,  घाव नमक ना लगा देना दीपक बन कर जल ना सको तो, अँधियारा भी मत करना  पुष्प नहीं बन सकते तो तुम,  काँटे बन कर मत रहना सच्चाई की राह में बेशक  कष्ट अनेकों मिलते हैं  पर काँटों के बीच में देखो  फूल हमेशा खिलते हैं  सूरज की भाँति खुद जल कर  सब जग को रोशन करना  पुष्प नहीं बन सकते तो तुम,  काँटे बन कर मत रहना भला किसी का कर ना सको त...

हो जायें बन्द आँखें प्रभु ध्यान करते करते

 🙏 *आज का वैदिक भजन* 🙏 00123   ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म्  ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म्  हो जायें बन्द आँखें  प्रभु ध्यान करते करते  अमृत बहाये वाणी  गुण गान करते करते हो जायें बन्द आँखें  प्रभु ध्यान करते करते  ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म्  ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म्  अपना मैं आप खो दूँ  तन की भी सुध रहे ना  हृदय रिझायें प्रभु को  मधु पान करते करते  हो जायें बन्द आँखें  प्रभु ध्यान करते करते  ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म्  ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म्  सत्य भाव की तरंगे  अन्तराल से निकले  हो जायें मौन मन भी  तेरा मान करते करते  हो जायें बन्द आँखें  प्रभु ध्यान करते करते  ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म्  ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म्  चित्त में रहे स्मृति  प्रभु नाम की रटन हो  हर्षाये मेरा अङ्ग अङ्ग  नव ज्ञान भरते भरते  हो जायें बन्द आँखें  प्रभु ध्यान करते करते  ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म्  ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म्  दिव्य ज्योति हो निराली...

कौन कहता रास रचैय्या थे घनश्याम

भजन : कौन कहता रास रचैय्या थे घनश्याम तर्ज : श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम 4 3 2 1 कौन कहता रास रचैय्या थे घनश्याSSSSम ..........$$$$........$$$$.......... कौन कहता रास रचैय्या थे घनश्याSSSSम ..........$$$$........$$$$.......... कौन कहता रास रचैय्या थे घनश्याम कौन कहता रास रचैय्या थे घनश्याम लोग यूँही करते श्रीकृष्ण को बदनाम लोग यूँही करते श्रीकृष्ण को बदनाम कौन कहता रास रचैय्या थे घनश्याम कौन कहता रास रचैय्या थे घनश्याम लोग यूँही करते श्रीकृष्ण को बदनाम लोग यूँही करते श्रीकृष्ण को बदनाम ..........$$$$........$$$$..........  4 3 2 1  हो SSSS योगिराज देशभक्त 'ओ३म्' के उपासक महान धर्मात्मा थे दुष्टों के संहारक ..........$$$$........$$$$..........  योगिराज देशभक्त 'ओ३म्' के उपासक महान धर्मात्मा थे दुष्टों के संहारक संध्या यज्ञ करते थे सुबह और शाम संध्या यज्ञ करते थे सुबह और शाम लोग यूँही करते श्रीकृष्ण को बदनाम लोग यूँही करते श्रीकृष्ण को बदनाम कौन कहता रास रचैय्या थे घनश्याम कौन कहता रास रचैय्या थे घनश्याम लोग यूँही करते श्रीकृष्ण को बदना...

सांवरे की बंसी तो गाये 'ओ३म्' नाम

भजन : सांवरे की बंसी तो गाये 'ओ३म्' नाम तर्ज : श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम 4 3 2 1 सांवरे की बंसी तो गाये 'ओ३म्' नाSSSम ..........$$$$........$$$$.......... कन्हैया की बंसी तो गाये 'ओ३म्' नाSSSम ..........$$$$........$$$$.......... वेदों वाला श्याम वो तो वेदों वाला श्याम कन्हैया की बंसी तो गाये 'ओ३म्' नाम लोग करे माधव को यूँही बदनाम लोग करे किशन को यूँही बदनाम सांवरे की बंसी तो गाये 'ओ३म्' नाम कन्हैया की बंसी तो गाये 'ओ३म्' नाम वेदों वाला श्याम वो तो वेदों वाला श्याम वेदों वाला श्याम वो तो वेदों वाला श्याम ..........$$$$........$$$$..........  4 3 2 1  हो SSSS वेद ज्ञान पढके हमें दिया विशुद्ध ज्ञान गीता आज कल के कथा वाचक कर रहे फजीता ..........$$$$........$$$$..........  वेद ज्ञान पढके हमें दिया विशुद्ध ज्ञान गीता आज कल के कथा वाचक कर रहे फजीता चोर जार शिखामणि दिया कैसा नाम चोर जार शिखामणि दिया कैसा नाम लोग करे माधव को यूँही बदनाम लोग करे किशन को यूँही बदनाम सांवरे की बंसी तो गाये 'ओ३म्' ना...

प्रभु नाम के साबुन से जो, मन का मैल छुड़ाएगा। निर्मल मन के दर्पण में वह, प्रभु का दर्शन पाएगा॥

  प्रभु नाम के साबुन से जो, मन का मैल छुड़ाएगा। निर्मल मन के दर्पण में वह, प्रभु का दर्शन पाएगा॥ नर शरीर अनमोल रे प्राणी, प्रभु कृपा से पाया है। झूठे जग प्रपंच में पड़ कर, क्यों प्रभु को बिसराया है। समय हाथ से निकल गया तो, समय हाथ से निकल गया तो, सिर धुन धुन पछताएगा। निर्मल मन के दर्पण में वह, प्रभु का दर्शन पाएगा॥  झूठ कपट निंदा को त्यागो, हर प्राणी से प्यार करो। घर पर आये अतिथि कोई तो, यथाशक्ति सत्कार करो। क्यों, पता नहीं किस रूप में आकर, पता नहीं किस रूप में आकर, नारायण मिल जाएगा। निर्मल मन के दर्पण में वह, प्रभु का दर्शन पाएगा॥  साधन तेरा कच्चा है, जब तक प्रभु पर विश्वास नहीं, मंजिल कर पाना है क्या, जब दीपक में प्रकाश नहीं। निश्चय है तो भवसागर से, निश्चय है तो भवसागर से, बेड़ा पार हो जाएगा। निर्मल मन के दर्पण में वह, प्रभु का दर्शन पाएगा॥  दौलत का अभिमान है झूठा, यह तो आनी जानी है। राजा रंक अनेक हुए, कितनों की सुनी कहानी है। ॐ नाम प्रिय महामंत्र ही, ॐ नाम प्रिय महामंत्र ही, साथ तुम्हारे जाएगा। निर्मल मन के दर्पण में वह, प्रभ...

दुनिया बनाने वाले, महिमा तेरी निराली चन्दा बनाया शीतल, सूरज में आग डाली

 *आज का वैदिक भजन* दुनिया बनाने वाले, महिमा तेरी निराली चन्दा बनाया शीतल, सूरज में आग डाली ऊँचे शिखर गिरी के, आकाश चूमते हैं वृक्षों के झुरमुटे भी, वायु में झूमते हैं सरिताऐं बहती कल-कल, निर्मल से नीर वाली चन्दा बनाया शीतल, सूरज में आग डाली दुनिया बनाने वाले फूलों का चूस कर रस, कैसा मधु बनाये मधुमक्खी में भी तूने, क्या यंत्र है लगाये मधु सबके मन को भाये, लाला हो चाहे लाली चन्दा बनाया शीतल, सूरज में आग डाली दुनिया बनाने वाले पत्तों को खा के कीड़ा, रेशम बना रहा है है कौन जो उदर में, चरखा चला रहा है बुन-बुन के आ रहा है, रेशम का लच्छा जाली चन्दा बनाया शीतल, सूरज में आग डाली दुनिया बनाने वाले बरसात के दिनों में, लेंटर टपकते देखा बयें के घोंसले में, पायी न जल की रेखा क्या तकनीकी सिखाई, तूने ओ जग के वाली चन्दा बनाया शीतल, सूरज में आग डाली दुनिया बनाने वाले जुगनू की दुम में तूने, क्या बल्ब है लगाया बरसात की निशा में, जंगल है जगमगाया पक्षी चकोर के क्या, आँखों में कशिश डाली चन्दा बनाया शीतल, सूरज में आग डाली दुनिया बनाने वाले मोरों के पंख देखो, क्या विचित्र चित्रकारी कोयल बनाई काली, आवाज प्या...

तेरे दर को छोड़ कर, किस दर जाऊँ मैं सुनता मेरी कौन है, किसे सुनाऊँ मैं

 *आज का वैदिक भजन* तेरे दर को छोड़ कर, किस दर जाऊँ मैं सुनता मेरी कौन है, किसे सुनाऊँ मैं याद भुलाई तेरी जब से, लाखों कष्ट उठाये हैं क्या जानूँ जीवन में मैंने, कितने पाप कमाये हैं हूँ शर्मिन्दा आपसे, क्या बतलाऊँ मैं तेरे दर को छोड़ कर, किस दर जाऊँ मैं मेरे पाप कर्म ही तुझसे, प्रीति न करने देते हैं कभी जो चाहूँ मिलूँ आपसे, रोक मुझे ये देते हैं कैसे स्वामी आपके दर्शन पाऊँ मैं तेरे दर को छोड़ कर, किस दर जाऊँ मैं तू है नाथ वरों का दाता, तुझसे वर सब पाते हैं ऋषि मुनि और योगी सारे, तेरे ही गुण गाते हैं छींटा दे दो ज्ञान का, होश में आऊँ मैं तेरे दर को छोड़ कर, किस दर जाऊँ मैं जो बीती सो बीती लेकिन, बाकी उमर सम्भालूँ मैं प्रेम पाश में बन्धा आपके, गीत प्रेम के गा लूँ मैं जीवन अपने आप का, सफल बना लूँ मैं  सुनता मेरी कौन है, किसे सुनाऊँ मैं तेरे दर को छोड़ कर, किस दर जाऊँ मैं

सृष्टि से पहले अमर ओ३म् नाम था, अमर ओ३म् नाम था, आज भी है और कल भी रहेगा।

 ओ३म् महिमा सृष्टि से पहले अमर ओ३म् नाम था, अमर ओ३म् नाम था,  आज भी है और कल भी रहेगा।  सूरज की किरणों में उसी का तेज समाया है।  और चाँद सितारों में उसी की शीतल छाया है।  पृथ्वी की गोद में उसी का दुलार था, उसी का दुलार था,  आज भी है और कल भी रहेगा।................................ सृष्टि से पहले .......,....................... भवरों की तानों में मधुर संगीत उसी का है।  फूलों की यौवन में रंगीला गीत उसी का है।  आकाश जल थल में वही कलाकार था, वही कलाकार था,  आज भी है और कल भी रहेगा।.................. सृष्टि से पहले.......................................... सुख दुःख का लम्बा लेखा विधाता ने रचाया है।  ऐ बन्दे ! तेरे कर्मों का नक्शा सामने आया है।  तेरे पिछले कर्मों का उसी पे हिसाब था, उसी पे हिसाब था,  आज भी है और कल भी रहेगा।................. सृष्टि से पहले ............................ न कर अभिमान एक दिन जान निकल जायेगी।  ये सजी सजाई काया मिट्टी में मिल जायेगी।  मुक्ति का एक रास्ता प्रभु का ही ध्यान था प्रभु का ही ध्यान था, आ...

ओ३म् नाम के हीरे-मोती, मैं बिखराऊँ गली-गली। ले लो रे कोई ओ३म् का प्यारा, आवाज लगाऊँ गली-गली ।।

 ओ३म् महिमा ओ३म् नाम के हीरे-मोती, मैं बिखराऊँ गली-गली।  ले लो रे कोई ओ३म् का प्यारा, आवाज लगाऊँ गली-गली ।। माया के दीवानों सुन लो, एक दिन ऐसा आयेगा। धन-दौलत और रूप खजाना, धरा यहीं रह जायेगा।।  सुन्दर काया माटी होगी, चर्चा होगी गली-गली ।। 1 ।।  ले लो रे कोई ओ३म् का प्यारा........................... मित्र प्यारे सगे-सम्बन्धी, इक दिन तुझे भुलायेंगे।  कल जो कहते अपना-अपना आग में तुझे जलायेंगे।।  दो दिन का यह चमन खिला है, फिर मुरझाये कली-कली।।2।।  ले लो रे कोई ओ३म् का प्यारा................................. क्यों करता है मेरी-मेरी, तज दे इस अभिमान को।  छोड़ जगत् के झूठे धंधे, जप ले प्रभु के नाम को।।  गया समय फिर हाथ न आये, तब पछताये घड़ी घड़ी।।3।  ले लो रे कोई ओ३म् का प्यारा............................. जिसको अपना कह करके, मूरख तू इतराता है।  छोड़ के बन्दे साथ विपद में, कभी न कोई जाता है।।  दो दिन का यह रैन बसेरा, आखिर होगी चला-चली।।4।।  ले लो रे कोई ओ३म् का प्यारा................................

ओ३म् है जीवन हमारा, ओ३म् प्राणाधार है।

 ओ३म् महिमा ओ३म् है जीवन हमारा, ओ३म् प्राणाधार है। ओ३म् है कर्ता विधाता, ओ३म् पालनहार है।। ओ३म् है दुःख का विनाशक, ओ३म् सर्वानन्द है। ओ३म् है बल तेजधारी, ओ३म् करुणाकन्द है।। ओ३म् सबका पूज्य है, हम ओ३म् का पूजन करें। ओ३म् ही के ध्यान से, हम शुद्ध अपना मन करें।। ओ३म् के गुरुमंत्र जपने से, रहेगा शुद्ध मन।  बुद्धि दिन-प्रतिदिन बढ़ेगी, धर्म में होगी लगन ।। ओ३म् के जप से हमारा, ज्ञान बढ़ता जाएगा।  अन्त में यह ओ३म् हमको मुक्ति तक पहुँचाएगा।।

इक बार भजन कर ले, मुक्ति का यतन कर ले। कट जायेंगे जनम मरण, प्रभु का चिन्तन कर ले।।

 इक बार भजन कर ले, मुक्ति का यतन कर ले।  कट जायेंगे जनम मरण, प्रभु का चिन्तन कर ले।। इक बार भजन कर ले .......................... यह मानव का चोला, हर बार नहीं मिलता,  जो गिर गया डाली से, वो फूल नहीं खिलता,  मौका है ये जीवन का, गुलजार चमन कर ले।। इक बार भजन कर ले.............................. नर इन कानों से सुन, तू ऋषियों की वाणी,  मन को ठहरा कर के, बन जा आत्मज्ञानी,  जिह्वा तो चले मुख में, अब ओ३म् जपन कर ले।। इक बार भजन कर ले................................ इस मैली चादर में, हैं दाग लगे कितने,  पर ज्ञान के साबुन में, हैं झाग भरे इतने,  धुल जाएगी सब स्याही, उजला तन मन कर ले।। इक बार भजन कर ले. .......,...................... वेदों में गूँज रहीं, मंत्रों की मधुर ध्वनियाँ,  बलिदान के इस युग में, तू गूंध नई कड़ियाँ,  अब तो प्रभु के आगे, नीची गर्दन कर ले।। इक बार भजन कर ले ...................... .. 

कर्मों की जंजीर न तोड़ी, प्यार प्रभु का तोड़ दिया। मोहमाया में अंधा बनकर, पाप से नाता जोड़ लिया।

 कर्मों की जंजीर न तोड़ी, प्यार प्रभु का तोड़ दिया।  मोहमाया में अंधा बनकर, पाप से नाता जोड़ लिया। कर्मों की जंजीर न तोड़ी................................ आया था तू इस दुनिया में, जीवन ज्योति जलाने को,  तजकर आया झूठे धंधे, प्रभु के दर्शन पाने को।  पर पग तेरे नहीं उठते हैं, प्रभु के दर तक जाने को।  प्रभु भक्ति को दिल से भुलाकर, सच्चा रास्ता छोड़ दिया।।1।। कर्मों की जंजीर न तोड़ी................................ गई जवानी आया बुढ़ापा, अब क्यों बैठा रोता है,  बीत गई सो जाने दे अब, शेष बची क्यों खोता है। सफल है जग में जीवन उसका, धर्म के बीज जो बोता है,  गंदे कर्मों में फँसकर, अनमोल जन्म क्यों खो दिया।।2।। कर्मों की जंजीर न तोड़ी................................ शाम-सवेरे हरदम दिल में, रहती तेरे माया है,  सोना-चाँदी देख-देखकर, डोली तेरी काया है। मोह अज्ञान का घोर अँधेरा, तेरे तन पर छाया है,  होके दीवाना इस दुनिया में, प्रभु से मुखड़ा मोड़ लिया।।3।। कर्मों की जंजीर न तोड़ी................................

मुझे तूने मालिक बहुत कुछ दिया है। तेरा शुक्रिया है, तेरा शुक्रिया है।।

  मुझे तूने मालिक बहुत कुछ दिया है।  तेरा शुक्रिया है, तेरा शुक्रिया है।। मुझे तूने मालिक .................... ना मिलती अगर दी हुई दात तेरी,  तो क्या थी जमाने में औकात मेरी,  यह बन्दा तो तेरे सहारे जिया है।। तेरा शुक्रिया है....................  यह जायदाद दी है ये औलाद दी है,  मुसीबत में हर वक्त इमदाद की है,  तेरा ही दिया मैंने खाया पिया है।। तेरा शुक्रिया है तेरा .................... मेरा ही नहीं है, सभी का तू दाता  सभी को सभी कुछ है देता दिलाता  जो खाली था दामन, वह तूने भरा है तेरा शुक्रिया है तेरा .................... मेरा भूल जाना तेरा ना भूलाना,  तेरी रहमतों का कहाँ है ठिकाना,  तेरी इस मोहब्बत ने पागल किया है।। तेरा शुक्रिया है तेरा .................... तेरी बन्दगी से मैं बन्दा हूँ मालिक,  तेरे ही करम से मैं जिन्दा हूँ मालिक,  तुम्हीं ने तो जीने के काबिल किया है।। तेरा शुक्रिया है तेरा....................

ओ३म् नाम के हीरे मोती मैं बिखराऊँ गली गली ले लो रे कोई ओ३म् का प्यारा

ओ३म् नाम के हीरे मोती मैं बिखराऊँ गली गली  ले लो रे कोई ओ३म् का प्यारा  आवाज लगाऊँ गली-गली  ओ३म् नाम के हीरे मोती मैं बिखराऊँ गली गली  माया के दीवानों सुन लो  इक दिन ऐसा आयेगा  धन दौलत और रूप खजाना  यहीं धरा रह जायेगा  सुन्दर काया माटी होगी  चर्चा होगी गली-गली  ओ३म् नाम के हीरे मोती मैं बिखराऊँ गली गली  मित्र-प्यारे और सगे-सम्बन्धी  एक दिन भूल जायेंगे  कहते हैं जो अपना-अपना  आग में तुझे जलायेंगे  दो दिन का ये चमन खिला है  फिर मुरझाए कली-कली  ओ३म् नाम के हीरे मोती मैं बिखराऊँ गली गली  क्यों करता है मेरी-तेरी  तज दे उस  अभिमान को  छोड़ जगत् के झूठे धन्धे  जप ले प्रभु के नाम को  गया समय फिर हाथ न आये  तब पछताये घड़ी धड़ी  ओ३म् नाम के हीरे मोती मैं बिखराऊँ गली गली  जिसको अपना कह-कह के  मूरख तू इतराता है  छोड़ के बन्दे साथ विपत्त/विपद् में  कभी न कोई जाता है  दो दिन का ये रैन-बसेरा  आखिर होगी चला चली   ओ३म् नाम के हीरे मोती मैं बिखरा...

डूबतों को बचा लेने वाले, मेरी नैया है तेरे हवाले।

डूबतों को बचा लेने वाले, मेरी नैया है तेरे हवाले। लाख अपनों को मैंने पुकारा, सबके सब कर गए हैं किनारा।  और देता न कोई दिखाई, सिर्फ तेरा ही अब तो सहारा।  कौन तुझ बिन भँवर से निकाले। मेरी नैया है तेरे हवाले..……....... जिस समय तू बचाने पे आए, आग में भी बचा कर दिखाए।  जिस पर तेरी दया दृष्टि होवे, उसपे कैसे कहीं आँच आए।  आँधियों में भी तू ही सँभाले ।  मेरी नैया है तेरे हवाले....….............. पृथ्वी सागर व पर्वत बनाए, तूने धरती पे दरिया बहाए।  चाँद सूरज करोड़ों सितारे, फूल आकाश में भी खिलाए।  तेरे सब काम जग से निराले।  मेरी नैया है तेरे हवाले.............. बिन तेरे चैन मिलता नहीं है, फूल आशा का खिलता नहीं है।  तेरी मर्जी बिना तो जहाँ में, 'पथिक' पत्ता भी हिलता नहीं है।  तेरे वश में अंधेरे उजाले ।। मेरी नैया है तेरे हवाले..................

प्रभु तेरी भक्ति का वर मांगते हैं। झुके तेरे दर पे वो सर मांगते हैं।।

 प्रभु तेरी भक्ति का वर मांगते हैं।  झुके तेरे दर पे वो सर मांगते हैं।। बुरे भाव से जो न देखे किसी को।  हम आँखों में ऐसी नजर मांगते हैं।। प्रभु तेरी भक्ति का........... पड़े अगर मुसीबत न झोली पसारें। हम हाथों में ऐसा हुनर मांगते हैं।।  पुकारे कोई दीन अबला हमें गर।  घड़ी पल में पहुँचे वो वर मांगते हैं।। प्रभु तेरी भक्ति का............. जो बेताब जुल्म और सितम देखकर हो।  तड़पता हुआ वो जिगर मांगते हैं।।  दुःखी या अनाथों की सेवा हो जिससे ।  प्रभु अपने घर ऐसा जर मांगते हैं।। प्रभु तेरी भक्ति का.............

प्रभु जी इतनी सी दया कर दो, हमको भी तुम्हारा प्यार मिले

  प्रार्थना प्रभु जी इतनी सी दया कर दो, हमको भी तुम्हारा प्यार मिले। कुछ और भले ही मिले न मिले, प्रभु दर्शन का अधिकार मिले । । 1 ।। जिस जीवन में जीवन ही नहीं, वह जीवन भी क्या जीवन है। जीवन तब जीवन बनता है, जब जीवन का आधार मिले।।2।। प्रभु जी इतनी सी दया कर दो...................... सब कुछ पाया इस जीवन में, बस एक तमन्ना बाकी है। हर प्रेम पुजारी के अपने, मन मंदिर में दातार मिले।।3।। प्रभु जी इतनी सी दया कर दो............. जिसने तुमसे जो कुछ मांगा, उसने ही वही तुम से पाया।  दुनिया को मिले दुनिया लेकिन, भक्तों को तेरा दरबार मिले।।4।। प्रभु जी इतनी सी दया कर दो.......... हम जन्म जन्म के प्यासे हैं, और तुम करुणा के सागर हो। करुणानिधि से करुणा रस की, एक बूँद हमें इक बार मिले। ।5।। प्रभु जी इतनी सी दया कर दो.............. कब से प्रभु दर्शन पाने की, हम आस लगाए बैठे हैं। पल दो पल भीतर आने की, अनुमति अनुपम सरकार मिले। ।6।। प्रभु जी इतनी सी दया कर दो.......... इस मार्ग पर चलते-चलते, सदियाँ ही नहीं युग बीत गए। मिल जाए 'पथिक' मंजिल अपनी, हमको भी तुम्हारा द्वार मिले। ।7।। प्रभु जी इतनी सी दया ...

कण-कण में जो रमा है, हर दिल में है समाया। उसकी उपासना ही कर्त्तव्य है बताया।।

 ईश महिमा कण-कण में जो रमा है, हर दिल में है समाया।  उसकी उपासना ही कर्त्तव्य है बताया।। दिल सोचता है खुद वो, कितना महान होगा।  इतना महान जिसने, संसार है बनाया।। कण-कण में जो रमा है............. देखो ये तन के पुर्जे, करते हैं काम कैसे।  जोड़ों के बीच कोई, कब्जा नहीं लगाया।। कण-कण में जो रमा है............ इक पल में रोशनी से, सारा जहान चमका।  सूरज का एक दीपक, आकाश में जलाया।। कण-कण में जो रमा है.......... अब तक यह गोल धरती, चक्कर लगा रही है।  फिरकी बना के कैसी, तरकीब से घुमाया।। कण-कण में जो रमा है................. कठपुतलियों का हम ने, देखो अजब तमाशा।  छुप कर किसी ने सब को, संकेत से नचाया।। कण-कण में जो रमा है............ हर वक्त बन के साथी, रहता है साथ सब के।  नादान 'पथिक' उसको, तू जानने ना पाया।। कण-कण में जो रमा है.........

जाप ना किया है तूने ओ३म् नाम का। करुणानिधान प्यारे सुख धाम का

 ओ३म् महिमा जाप ना किया है तूने ओ३म् नाम का।  करुणानिधान प्यारे सुख धाम का।। टेक ।। जिन्दगी में कोई शुभ करम न किया।  धर्म ना किया, दूर भरम ना किया।।  बोल तेरा तन फिर किस काम का।।1।। जाप ना किया है तूने.............. दिन-रात जिसको सजाने में लगा।  अपने ही मन को रिझाने में लगा।।  कुछ ना बनेगा तेरे गोरे चाम का।।2।। जाप ना किया है तूने............... उल्टे ही कर्म तू कमाये उमर भर।  पेड़ ही बबूल के लगाये उमर भर।।  कहाँ से मिलेगा तुझे फल आम का।।3।। जाप ना किया है तूने................. खुशी का पैगाम तो प्रभात लाई है।  और भी बेमोल कुछ साथ लाई है।।  जाने क्या संदेशा लाये वक्त शाम का।।4।। जाप ना किया है तूने................