प्रभु सारी दुनियाँ से ऊँची तेरी शान है। कितना महान् है तू कितना महान् है।

 ईश महिमा प्रभु सारी दुनियाँ से ऊँची तेरी शान है।  कितना महान् है तू कितना महान् है। यहाँ वहाँ कोने-कोने तू ही मशहूर है।  निकट से निकट और दूर से भी दूर है।  'तुझमें समाया हुआ सकल जहान है।' कितना महान् है तू कितना महान् है ...... तू ही एक मालिक है सारी कायनात का।  फूलों भरी क्यारियों का तारों की जमात का।  तेरी ही जमीन है यह तेरा आसमान है। कितना महान् है तू कितना महान् है. सबने जो रंक देखे सभी तेरे रंग हैं।  जग में अनेक तेरे पालने के ढंग हैं।  तुझको तो छोटे-बड़े सबका ही ध्यान है। कितना महान् है तू कितना महान् है. जितने भी दुनियाँ में जीव देहधारी हैं।  सभी तेरे प्यार के समान अधिकारी हैं।  'पथिक' सभी को दिया तूने वरदान है। कितना महान् है तू कितना महान् है

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 आचार्य श्री प्रेम आर्य

एक भारतीय वैदिक पुरोहित, आध्यात्मिक नेता और कथावाचक हैं। इसके अतिरिक्त, वे आर्य समाज मंदिर, मानपुर, गया जी  के सदस्य हैं ।

नाम - आचार्य श्री प्रेम आर्य 

जन्म स्थान - जनकपुर, गया जी, बिहार 

जन्म तिथि - 01/08/1993

शिक्षा - प्रारम्भिक शिक्षा गया शहर में ही हुआ, तत्पश्चात उच्च शिक्षा - अन्तर्राष्ट्रीय उपदेशक महाविद्यालय टंकारा, राजकोट, गुजरात से प्राप्त किये।

पेशा - वैदिक पुरोहित एवं आध्यात्मिक गुरु 2010 ईस्वी से अबतक।

धर्म - सत्य सनातन वैदिक धर्म  (हिन्दू)। 

बेवसाइट - www.aryasamajmandirpandit.in 



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