सत्याचरण ही सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है

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  ।।सत्याचरण ही सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है।। आचार्य श्री प्रेम आर्य, वैदिक पुरोहित, गया जी, 9304366018 ओ३म् व्रतेन दीक्षामाप्नोति दीक्षयाप्नोति दक्षिणाम्।            दक्षिणा श्रद्धामाप्नोति श्रद्धाया सत्यमाप्यते।।                                          य०अ०- १९,मं०-३०  भावार्थ-           (व्रतेन) जो मनुष्य सत्य के आचरण को दृढ़ता से करता है, तब वह दीक्षा अर्थात उत्तम अधिकार के फल को प्राप्त करता है।(दीक्षयाप्नोति०) जब मनुष्य उत्तम गुणों से युक्त होता है, तब सब लोग सब प्रकार से उसका सत्कार करते हैं। क्योंकि धर्म आदि शुभ गुणों से ही उस दक्षिणा को मनुष्य प्राप्त होता है, अन्यथा नहीं।(दक्षिणा श्र०) जब ब्रह्मचर्य आदि सत्यव्रतों से अपना और दूसरे मनुष्यों का अत्यंत सत्कार होता है, तब उसी में दृढ़ विश्वास होता है। क्योंकि सत्य धर्म का आचरण ही मनुष्यों का सत्कार करने वाला है।(श्रद्धया) फिर सत्य के आचरण में जितनी जितनी अधिक ...

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 आचार्य श्री प्रेम आर्य

एक भारतीय वैदिक पुरोहित, आध्यात्मिक नेता और कथावाचक हैं। इसके अतिरिक्त, वे आर्य समाज मंदिर, मानपुर, गया जी  के सदस्य हैं ।

नाम - आचार्य श्री प्रेम आर्य 

जन्म स्थान - जनकपुर, गया जी, बिहार 

जन्म तिथि - 01/08/1993

शिक्षा - प्रारम्भिक शिक्षा गया शहर में ही हुआ, तत्पश्चात उच्च शिक्षा - अन्तर्राष्ट्रीय उपदेशक महाविद्यालय टंकारा, राजकोट, गुजरात से प्राप्त किये।

पेशा - वैदिक पुरोहित एवं आध्यात्मिक गुरु 2010 ईस्वी से अबतक।

धर्म - सत्य सनातन वैदिक धर्म  (हिन्दू)। 

बेवसाइट - www.aryasamajmandirpandit.in 



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