मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया

 मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया देने वाले ने दिया, वो भी दिया किस शान से मेरा है ये लेने वाला, कह उठा अभिमान से मैं - मेरा यह कहने वाला, मन किसी का है दिया मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया जो मिला है वो हमेशा, पास रह सकता नहीं कब बिछुड़ जाये ये कोई, राज कह सकता नहीं जिन्दगानी का खिला, मधुवन किसी का है दिया मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया जग की सेवा, खोज अपनी, प्रीति उनसे कीजिये जिन्दगी का राज है ये, जान कर जी लीजिये साधना की राह पर, साधन किसी का है दिया मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया

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 आचार्य श्री प्रेम आर्य

एक भारतीय वैदिक पुरोहित, आध्यात्मिक नेता और कथावाचक हैं। इसके अतिरिक्त, वे आर्य समाज मंदिर, मानपुर, गया जी  के सदस्य हैं ।

नाम - आचार्य श्री प्रेम आर्य 

जन्म स्थान - जनकपुर, गया जी, बिहार 

जन्म तिथि - 01/08/1993

शिक्षा - प्रारम्भिक शिक्षा गया शहर में ही हुआ, तत्पश्चात उच्च शिक्षा - अन्तर्राष्ट्रीय उपदेशक महाविद्यालय टंकारा, राजकोट, गुजरात से प्राप्त किये।

पेशा - वैदिक पुरोहित एवं आध्यात्मिक गुरु 2010 ईस्वी से अबतक।

धर्म - सत्य सनातन वैदिक धर्म  (हिन्दू)। 

बेवसाइट - www.aryasamajmandirpandit.in 



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