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जीवात्माओं वा मनुष्यों के शरीरों की आकृति व सामर्थ्य में भेद का कारण”

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 ओ३म् “जीवात्माओं वा मनुष्यों के शरीरों की आकृति व सामर्थ्य में भेद का कारण” ========== जीवात्मा जन्म-मरणधर्मा है। ईश्वर की व्यवस्था से इसे अपने पूर्वजन्मों के कर्मानुसार जाति, आयु व भोग प्राप्त होते हैं। इन तीनों कार्यों को प्राप्त करने में यह परतन्त्र है। जीव मनुष्य योनि में जन्म लेने के बाद कर्म करने में तो स्वतन्त्र है परन्तु उनके फल इसे ईश्वर की व्यवस्था से मिलते हैं जिसमें यह परतन्त्र होता है। यह भी ज्ञातव्य है कि मनुष्य योनि उभय योनि होती है। इस योनि में मनुष्य स्वतन्त्रतापूर्वक कर्म करता है और अपने पूर्व किये हुए कर्मों के फलों को भोगता भी है। फलों के भोग में यह परतन्त्र होता है। मनुष्य से इतर सभी योनियां केवल भोग योनियां होती है। इन योनियों में जीवात्मा अपने पूर्वजन्म के कर्मों के फलों का भोग ही करता है। पशु आदि भोग योनियों में वह अपनी बुद्धि से सोच कर कोई धर्म व परमार्थ का कार्य नहीं कर सकता। उसके सभी भोग, अर्थात् सुख और दुःख, ईश्वर से निर्धारित होते हैं। इन भोग योनियों में हमारी मनुष्य योनि की जीवात्मा को भी परजन्म लेकर दुःख न उठाने पड़े, इसीलिये मनुष्य योनि में हमें सत्य...

आजादी का सच

 गीत -आजादी का सच ( तर्ज: अपनी आजादी को हम हरगिज़ भुला सकते नहीं )  आर्यों की कुर्बानी को हम , हरगिज़ भुला सकते नहीं । आजादी का सच कहेंगे, सच छुपा सकते नहीं।। सच छुपा सकते नहीं।। १. बाद सन सत्तावन के जब, भारत में उदासी छाई थी फिरंगियों की कूटनीति से, हमने मुंह की खाई थी तब दयानंद स्वामी ने गौरव जगाया देश का हुंकार स्वदेशी स्वराज की सबसे पहले लगाई थी। ये अटल वो सत्य है,जिसको झुठा सकते नहीं।। आजादी का सच कहेंगे ---- २. आजादी के आंदोलन का जब, सच बताया जाएगा  सबसे ज्यादा आर्य थे, जेलों में जिक्र आएगा करते रहे संध्या उपदेश,सहकर के कष्ट जेल में ये कटु वो सत्य है जिसे,जेलर ना भूल पाएगा।  नेहरू मोहानी रिपोर्ट, हम भुला सकते नही।। आजादी का सच ------ ३. परमानन्द महावीर पहुंचे काला पानी में होतीलाल पृथ्वी सिंह सड़ गए काला पानी में  जोते गये कोल्हू में जयदेव और नंद गोपाल, सेलुलर में आहुति दी,रामरखा बाली ने  हैं अमिट ये नाम, हम ये नाम मिटा सकते नहीं।। आजादी का सच--------- ४. बिस्मिल रोशन चढ गये, फांसी भरी जवानी में कोई कसर छोड़ी नहीं, गोरों ने मनमानी में  लाजपत ने ख...

मिलता है सच्चा सुख, भगवान् तुम्हारे चरणों में।

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 मिलता है सच्चा सुख, भगवान् तुम्हारे चरणों में।  यह विनती है पल-पल छिन-छिन, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में।।1।। मिलता है सच्चा सुख भगवान् .................. चाहे वैरी कुल संसार बने, चाहे जीवन मुझ पर भार बने।  चाहे मौत गले का हार बने, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में।।2।। मिलता है सच्चा सुख भगवान् ............... चाहे कष्टों ने मुझे घेरा हो, चाहे चारों ओर अंधेरा हो। पर चित्त न डगमगा मेरा हो, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में।।3।। मिलता है सच्चा सुख भगवान्................. मेरी जिह्वा पर तेरा नाम रहे, तेरी याद सुबह और शाम रहे।  बस काम यह आठों याम रहे, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में।।4।। मिलता है सच्चा सुख भगवान्.................. चाहे कांटों में मुझे चलना हो, चाहे अग्नि में मुझे जलना हो।  चाहे छोड़ के देश निकलना हो, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में।।5।। मिलता है सच्चा सुख भगवान्.......................

ओ३म् नाम के हीरे मोती मैं बिखराऊँ गली गली ले लो रे कोई ओ३म् का प्यारा

ओ३म् नाम के हीरे मोती मैं बिखराऊँ गली गली  ले लो रे कोई ओ३म् का प्यारा  आवाज लगाऊँ गली-गली  ओ३म् नाम के हीरे मोती मैं बिखराऊँ गली गली  माया के दीवानों सुन लो  इक दिन ऐसा आयेगा  धन दौलत और रूप खजाना  यहीं धरा रह जायेगा  सुन्दर काया माटी होगी  चर्चा होगी गली-गली  ओ३म् नाम के हीरे मोती मैं बिखराऊँ गली गली  मित्र-प्यारे और सगे-सम्बन्धी  एक दिन भूल जायेंगे  कहते हैं जो अपना-अपना  आग में तुझे जलायेंगे  दो दिन का ये चमन खिला है  फिर मुरझाए कली-कली  ओ३म् नाम के हीरे मोती मैं बिखराऊँ गली गली  क्यों करता है मेरी-तेरी  तज दे उस  अभिमान को  छोड़ जगत् के झूठे धन्धे  जप ले प्रभु के नाम को  गया समय फिर हाथ न आये  तब पछताये घड़ी धड़ी  ओ३म् नाम के हीरे मोती मैं बिखराऊँ गली गली  जिसको अपना कह-कह के  मूरख तू इतराता है  छोड़ के बन्दे साथ विपत्त/विपद् में  कभी न कोई जाता है  दो दिन का ये रैन-बसेरा  आखिर होगी चला चली   ओ३म् नाम के हीरे मोती मैं बिखरा...

प्रभु सारी दुनियाँ से, ऊँची तेरी शान है। कितना महान् है तू, कितना महान है।।

 प्रभु सारी दुनियाँ से, ऊँची तेरी शान है।  कितना महान् है तू, कितना महान है।। यहाँ वहाँ कोने कोने, तू ही मशहूर है।  निकट से निकट और, दूर से भी दूर है।  तुझमें समाया हुआ, सकल जहान है।। प्रभु सारी दुनियाँ से ऊँची................ तू ही एक मालिक है, सारी कायनात का। फूलों भरी क्यारियों का, तारों की जमात का।  तेरी ही जमीन है ये, तेरा आसमान है।। प्रभु सारी दुनियाँ से ऊँची............... सबने जो रंग देखे, सभी तेरे रंग हैं।  जग में अनेक तेरे, पालन के ढंग हैं।  तुझको तो छोटे बड़े, सबका ही ध्यान है।। प्रभु सारी दुनियाँ से ऊँची.................. जितने भी दुनियाँ में, जीव देहधारी है।  सभी तेरे प्यार के, समान अधिकारी हैं।  'पथिक' सभी को तूने, दिया वरदान है।। प्रभु सारी दुनियाँ से, ऊँची तेरी शान है। कितना महान् है तू, कितना महान है।।

डूबतों को बचा लेने वाले, मेरी नैया है तेरे हवाले।

डूबतों को बचा लेने वाले, मेरी नैया है तेरे हवाले। लाख अपनों को मैंने पुकारा, सबके सब कर गए हैं किनारा।  और देता न कोई दिखाई, सिर्फ तेरा ही अब तो सहारा।  कौन तुझ बिन भँवर से निकाले। मेरी नैया है तेरे हवाले..……....... जिस समय तू बचाने पे आए, आग में भी बचा कर दिखाए।  जिस पर तेरी दया दृष्टि होवे, उसपे कैसे कहीं आँच आए।  आँधियों में भी तू ही सँभाले ।  मेरी नैया है तेरे हवाले....….............. पृथ्वी सागर व पर्वत बनाए, तूने धरती पे दरिया बहाए।  चाँद सूरज करोड़ों सितारे, फूल आकाश में भी खिलाए।  तेरे सब काम जग से निराले।  मेरी नैया है तेरे हवाले.............. बिन तेरे चैन मिलता नहीं है, फूल आशा का खिलता नहीं है।  तेरी मर्जी बिना तो जहाँ में, 'पथिक' पत्ता भी हिलता नहीं है।  तेरे वश में अंधेरे उजाले ।। मेरी नैया है तेरे हवाले..................

प्रभु तेरी भक्ति का वर मांगते हैं। झुके तेरे दर पे वो सर मांगते हैं।।

 प्रभु तेरी भक्ति का वर मांगते हैं।  झुके तेरे दर पे वो सर मांगते हैं।। बुरे भाव से जो न देखे किसी को।  हम आँखों में ऐसी नजर मांगते हैं।। प्रभु तेरी भक्ति का........... पड़े अगर मुसीबत न झोली पसारें। हम हाथों में ऐसा हुनर मांगते हैं।।  पुकारे कोई दीन अबला हमें गर।  घड़ी पल में पहुँचे वो वर मांगते हैं।। प्रभु तेरी भक्ति का............. जो बेताब जुल्म और सितम देखकर हो।  तड़पता हुआ वो जिगर मांगते हैं।।  दुःखी या अनाथों की सेवा हो जिससे ।  प्रभु अपने घर ऐसा जर मांगते हैं।। प्रभु तेरी भक्ति का.............

प्रभु जी इतनी सी दया कर दो, हमको भी तुम्हारा प्यार मिले

  प्रार्थना प्रभु जी इतनी सी दया कर दो, हमको भी तुम्हारा प्यार मिले। कुछ और भले ही मिले न मिले, प्रभु दर्शन का अधिकार मिले । । 1 ।। जिस जीवन में जीवन ही नहीं, वह जीवन भी क्या जीवन है। जीवन तब जीवन बनता है, जब जीवन का आधार मिले।।2।। प्रभु जी इतनी सी दया कर दो...................... सब कुछ पाया इस जीवन में, बस एक तमन्ना बाकी है। हर प्रेम पुजारी के अपने, मन मंदिर में दातार मिले।।3।। प्रभु जी इतनी सी दया कर दो............. जिसने तुमसे जो कुछ मांगा, उसने ही वही तुम से पाया।  दुनिया को मिले दुनिया लेकिन, भक्तों को तेरा दरबार मिले।।4।। प्रभु जी इतनी सी दया कर दो.......... हम जन्म जन्म के प्यासे हैं, और तुम करुणा के सागर हो। करुणानिधि से करुणा रस की, एक बूँद हमें इक बार मिले। ।5।। प्रभु जी इतनी सी दया कर दो.............. कब से प्रभु दर्शन पाने की, हम आस लगाए बैठे हैं। पल दो पल भीतर आने की, अनुमति अनुपम सरकार मिले। ।6।। प्रभु जी इतनी सी दया कर दो.......... इस मार्ग पर चलते-चलते, सदियाँ ही नहीं युग बीत गए। मिल जाए 'पथिक' मंजिल अपनी, हमको भी तुम्हारा द्वार मिले। ।7।। प्रभु जी इतनी सी दया ...

कण-कण में जो रमा है, हर दिल में है समाया। उसकी उपासना ही कर्त्तव्य है बताया।।

 ईश महिमा कण-कण में जो रमा है, हर दिल में है समाया।  उसकी उपासना ही कर्त्तव्य है बताया।। दिल सोचता है खुद वो, कितना महान होगा।  इतना महान जिसने, संसार है बनाया।। कण-कण में जो रमा है............. देखो ये तन के पुर्जे, करते हैं काम कैसे।  जोड़ों के बीच कोई, कब्जा नहीं लगाया।। कण-कण में जो रमा है............ इक पल में रोशनी से, सारा जहान चमका।  सूरज का एक दीपक, आकाश में जलाया।। कण-कण में जो रमा है.......... अब तक यह गोल धरती, चक्कर लगा रही है।  फिरकी बना के कैसी, तरकीब से घुमाया।। कण-कण में जो रमा है................. कठपुतलियों का हम ने, देखो अजब तमाशा।  छुप कर किसी ने सब को, संकेत से नचाया।। कण-कण में जो रमा है............ हर वक्त बन के साथी, रहता है साथ सब के।  नादान 'पथिक' उसको, तू जानने ना पाया।। कण-कण में जो रमा है.........

जाप ना किया है तूने ओ३म् नाम का। करुणानिधान प्यारे सुख धाम का

 ओ३म् महिमा जाप ना किया है तूने ओ३म् नाम का।  करुणानिधान प्यारे सुख धाम का।। टेक ।। जिन्दगी में कोई शुभ करम न किया।  धर्म ना किया, दूर भरम ना किया।।  बोल तेरा तन फिर किस काम का।।1।। जाप ना किया है तूने.............. दिन-रात जिसको सजाने में लगा।  अपने ही मन को रिझाने में लगा।।  कुछ ना बनेगा तेरे गोरे चाम का।।2।। जाप ना किया है तूने............... उल्टे ही कर्म तू कमाये उमर भर।  पेड़ ही बबूल के लगाये उमर भर।।  कहाँ से मिलेगा तुझे फल आम का।।3।। जाप ना किया है तूने................. खुशी का पैगाम तो प्रभात लाई है।  और भी बेमोल कुछ साथ लाई है।।  जाने क्या संदेशा लाये वक्त शाम का।।4।। जाप ना किया है तूने................

सृष्टि से पहले अमर ओ३म् नाम था, अमर ओ३म् नाम था, आज भी है और कल भी रहेगा।

 ओ३म् महिमा सृष्टि से पहले अमर ओ३म् नाम था, अमर ओ३म् नाम था,  आज भी है और कल भी रहेगा।  सूरज की किरणों में उसी का तेज समाया है।  और चाँद सितारों में उसी की शीतल छाया है।  पृथ्वी की गोद में उसी का दुलार था, उसी का दुलार था,  आज भी है और कल भी रहेगा। सृष्टि से पहले.................... भवरों की तानों में मधुर संगीत उसी का है।  फूलों की यौवन में रंगीला गीत उसी का है।  आकाश जल थल में वही कलाकार था, वही कलाकार था,  आज भी है और कल भी रहेगा। सृष्टि से पहले....................... सुख दुःख का लम्बा लेखा विधाता ने रचाया है।  ऐ बन्दे ! तेरे कर्मों का नक्शा सामने आया है।  तेरे पिछले कर्मों का उसी पे हिसाब था, उसी पे हिसाब था,  आज भी है और कल भी रहेगा। सृष्टि से पहले................. न कर अभिमान एक दिन जान निकल जायेगी।  ये सजी सजाई काया मिट्टी में मिल जायेगी।  मुक्ति का एक रास्ता प्रभु का ही ध्यान था प्रभु का ही ध्यान था,  आज भी है और कल भी रहेगा। सृष्टि से पहले अमर ओ३म् नाम था, अमर ओ३म् नाम था,  आज भी है और कल भी रहेगा।