प्रभु सारी दुनियाँ से ऊँची तेरी शान है। कितना महान् है तू कितना महान् है।

 ईश महिमा प्रभु सारी दुनियाँ से ऊँची तेरी शान है।  कितना महान् है तू कितना महान् है। यहाँ वहाँ कोने-कोने तू ही मशहूर है।  निकट से निकट और दूर से भी दूर है।  'तुझमें समाया हुआ सकल जहान है।' कितना महान् है तू कितना महान् है ...... तू ही एक मालिक है सारी कायनात का।  फूलों भरी क्यारियों का तारों की जमात का।  तेरी ही जमीन है यह तेरा आसमान है। कितना महान् है तू कितना महान् है. सबने जो रंक देखे सभी तेरे रंग हैं।  जग में अनेक तेरे पालने के ढंग हैं।  तुझको तो छोटे-बड़े सबका ही ध्यान है। कितना महान् है तू कितना महान् है. जितने भी दुनियाँ में जीव देहधारी हैं।  सभी तेरे प्यार के समान अधिकारी हैं।  'पथिक' सभी को दिया तूने वरदान है। कितना महान् है तू कितना महान् है

प्रभु तेरी भक्ति का वर मांगते हैं। झुके तेरे दर पे वो सर मांगते हैं।।

 प्रभु तेरी भक्ति का वर मांगते हैं।

 झुके तेरे दर पे वो सर मांगते हैं।।

बुरे भाव से जो न देखे किसी को।

 हम आँखों में ऐसी नजर मांगते हैं।।

प्रभु तेरी भक्ति का...........


पड़े अगर मुसीबत न झोली पसारें।

हम हाथों में ऐसा हुनर मांगते हैं।। 

पुकारे कोई दीन अबला हमें गर। 

घड़ी पल में पहुँचे वो वर मांगते हैं।।

प्रभु तेरी भक्ति का.............


जो बेताब जुल्म और सितम देखकर हो। 

तड़पता हुआ वो जिगर मांगते हैं।। 

दुःखी या अनाथों की सेवा हो जिससे । 

प्रभु अपने घर ऐसा जर मांगते हैं।।

प्रभु तेरी भक्ति का.............

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

आर्य समाज में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया बहुत ही सरल और वैदिक परंपराओं के अनुसार होती है।

शुभ विवाह की वर्षगांठ पर, सौ-सौ बार बधाई हो।

वैदिक संस्कृति बनाम बाज़ार संस्कृति

प्रभु जी इतनी सी दया कर दो, हमको भी तुम्हारा प्यार मिले

धर्म किसे कहते है ? क्या हिन्दू, इस्लाम, आदि धर्म है?