प्रभु सारी दुनियाँ से ऊँची तेरी शान है। कितना महान् है तू कितना महान् है।

 ईश महिमा प्रभु सारी दुनियाँ से ऊँची तेरी शान है।  कितना महान् है तू कितना महान् है। यहाँ वहाँ कोने-कोने तू ही मशहूर है।  निकट से निकट और दूर से भी दूर है।  'तुझमें समाया हुआ सकल जहान है।' कितना महान् है तू कितना महान् है ...... तू ही एक मालिक है सारी कायनात का।  फूलों भरी क्यारियों का तारों की जमात का।  तेरी ही जमीन है यह तेरा आसमान है। कितना महान् है तू कितना महान् है. सबने जो रंक देखे सभी तेरे रंग हैं।  जग में अनेक तेरे पालने के ढंग हैं।  तुझको तो छोटे-बड़े सबका ही ध्यान है। कितना महान् है तू कितना महान् है. जितने भी दुनियाँ में जीव देहधारी हैं।  सभी तेरे प्यार के समान अधिकारी हैं।  'पथिक' सभी को दिया तूने वरदान है। कितना महान् है तू कितना महान् है

डूबतों को बचा लेने वाले, मेरी नैया है तेरे हवाले।


डूबतों को बचा लेने वाले, मेरी नैया है तेरे हवाले।


लाख अपनों को मैंने पुकारा, सबके सब कर गए हैं किनारा।

 और देता न कोई दिखाई, सिर्फ तेरा ही अब तो सहारा। 

कौन तुझ बिन भँवर से निकाले।

मेरी नैया है तेरे हवाले..…….......


जिस समय तू बचाने पे आए, आग में भी बचा कर दिखाए।

 जिस पर तेरी दया दृष्टि होवे, उसपे कैसे कहीं आँच आए।

 आँधियों में भी तू ही सँभाले । 

मेरी नैया है तेरे हवाले....…..............


पृथ्वी सागर व पर्वत बनाए, तूने धरती पे दरिया बहाए। 

चाँद सूरज करोड़ों सितारे, फूल आकाश में भी खिलाए। 

तेरे सब काम जग से निराले। 

मेरी नैया है तेरे हवाले..............


बिन तेरे चैन मिलता नहीं है, फूल आशा का खिलता नहीं है। 

तेरी मर्जी बिना तो जहाँ में, 'पथिक' पत्ता भी हिलता नहीं है। 

तेरे वश में अंधेरे उजाले ।।

मेरी नैया है तेरे हवाले..................


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