प्रभु सारी दुनियाँ से ऊँची तेरी शान है। कितना महान् है तू कितना महान् है।

 ईश महिमा प्रभु सारी दुनियाँ से ऊँची तेरी शान है।  कितना महान् है तू कितना महान् है। यहाँ वहाँ कोने-कोने तू ही मशहूर है।  निकट से निकट और दूर से भी दूर है।  'तुझमें समाया हुआ सकल जहान है।' कितना महान् है तू कितना महान् है ...... तू ही एक मालिक है सारी कायनात का।  फूलों भरी क्यारियों का तारों की जमात का।  तेरी ही जमीन है यह तेरा आसमान है। कितना महान् है तू कितना महान् है. सबने जो रंक देखे सभी तेरे रंग हैं।  जग में अनेक तेरे पालने के ढंग हैं।  तुझको तो छोटे-बड़े सबका ही ध्यान है। कितना महान् है तू कितना महान् है. जितने भी दुनियाँ में जीव देहधारी हैं।  सभी तेरे प्यार के समान अधिकारी हैं।  'पथिक' सभी को दिया तूने वरदान है। कितना महान् है तू कितना महान् है

कण-कण में जो रमा है, हर दिल में है समाया। उसकी उपासना ही कर्त्तव्य है बताया।।

 ईश महिमा


कण-कण में जो रमा है, हर दिल में है समाया। 

उसकी उपासना ही कर्त्तव्य है बताया।।


दिल सोचता है खुद वो, कितना महान होगा।

 इतना महान जिसने, संसार है बनाया।।

कण-कण में जो रमा है.............


देखो ये तन के पुर्जे, करते हैं काम कैसे। 

जोड़ों के बीच कोई, कब्जा नहीं लगाया।।

कण-कण में जो रमा है............


इक पल में रोशनी से, सारा जहान चमका।

 सूरज का एक दीपक, आकाश में जलाया।।

कण-कण में जो रमा है..........


अब तक यह गोल धरती, चक्कर लगा रही है। 

फिरकी बना के कैसी, तरकीब से घुमाया।।

कण-कण में जो रमा है.................


कठपुतलियों का हम ने, देखो अजब तमाशा। 

छुप कर किसी ने सब को, संकेत से नचाया।।

कण-कण में जो रमा है............


हर वक्त बन के साथी, रहता है साथ सब के। 

नादान 'पथिक' उसको, तू जानने ना पाया।।

कण-कण में जो रमा है.........



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