मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया

 मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया देने वाले ने दिया, वो भी दिया किस शान से मेरा है ये लेने वाला, कह उठा अभिमान से मैं - मेरा यह कहने वाला, मन किसी का है दिया मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया जो मिला है वो हमेशा, पास रह सकता नहीं कब बिछुड़ जाये ये कोई, राज कह सकता नहीं जिन्दगानी का खिला, मधुवन किसी का है दिया मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया जग की सेवा, खोज अपनी, प्रीति उनसे कीजिये जिन्दगी का राज है ये, जान कर जी लीजिये साधना की राह पर, साधन किसी का है दिया मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया

कण-कण में जो रमा है, हर दिल में है समाया। उसकी उपासना ही कर्त्तव्य है बताया।।

 ईश महिमा


कण-कण में जो रमा है, हर दिल में है समाया। 

उसकी उपासना ही कर्त्तव्य है बताया।।


दिल सोचता है खुद वो, कितना महान होगा।

 इतना महान जिसने, संसार है बनाया।।

कण-कण में जो रमा है.............


देखो ये तन के पुर्जे, करते हैं काम कैसे। 

जोड़ों के बीच कोई, कब्जा नहीं लगाया।।

कण-कण में जो रमा है............


इक पल में रोशनी से, सारा जहान चमका।

 सूरज का एक दीपक, आकाश में जलाया।।

कण-कण में जो रमा है..........


अब तक यह गोल धरती, चक्कर लगा रही है। 

फिरकी बना के कैसी, तरकीब से घुमाया।।

कण-कण में जो रमा है.................


कठपुतलियों का हम ने, देखो अजब तमाशा। 

छुप कर किसी ने सब को, संकेत से नचाया।।

कण-कण में जो रमा है............


हर वक्त बन के साथी, रहता है साथ सब के। 

नादान 'पथिक' उसको, तू जानने ना पाया।।

कण-कण में जो रमा है.........



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