प्रभु सारी दुनियाँ से ऊँची तेरी शान है। कितना महान् है तू कितना महान् है।

 ईश महिमा प्रभु सारी दुनियाँ से ऊँची तेरी शान है।  कितना महान् है तू कितना महान् है। यहाँ वहाँ कोने-कोने तू ही मशहूर है।  निकट से निकट और दूर से भी दूर है।  'तुझमें समाया हुआ सकल जहान है।' कितना महान् है तू कितना महान् है ...... तू ही एक मालिक है सारी कायनात का।  फूलों भरी क्यारियों का तारों की जमात का।  तेरी ही जमीन है यह तेरा आसमान है। कितना महान् है तू कितना महान् है. सबने जो रंक देखे सभी तेरे रंग हैं।  जग में अनेक तेरे पालने के ढंग हैं।  तुझको तो छोटे-बड़े सबका ही ध्यान है। कितना महान् है तू कितना महान् है. जितने भी दुनियाँ में जीव देहधारी हैं।  सभी तेरे प्यार के समान अधिकारी हैं।  'पथिक' सभी को दिया तूने वरदान है। कितना महान् है तू कितना महान् है

सृष्टि से पहले अमर ओ३म् नाम था, अमर ओ३म् नाम था, आज भी है और कल भी रहेगा।

 ओ३म् महिमा


सृष्टि से पहले अमर ओ३म् नाम था, अमर ओ३म् नाम था, 

आज भी है और कल भी रहेगा। 


सूरज की किरणों में उसी का तेज समाया है। 

और चाँद सितारों में उसी की शीतल छाया है।

 पृथ्वी की गोद में उसी का दुलार था, उसी का दुलार था, 

आज भी है और कल भी रहेगा।

सृष्टि से पहले....................


भवरों की तानों में मधुर संगीत उसी का है। 

फूलों की यौवन में रंगीला गीत उसी का है। 

आकाश जल थल में वही कलाकार था, वही कलाकार था, 

आज भी है और कल भी रहेगा।

सृष्टि से पहले.......................


सुख दुःख का लम्बा लेखा विधाता ने रचाया है।

 ऐ बन्दे ! तेरे कर्मों का नक्शा सामने आया है। 

तेरे पिछले कर्मों का उसी पे हिसाब था, उसी पे हिसाब था, 

आज भी है और कल भी रहेगा।

सृष्टि से पहले.................


न कर अभिमान एक दिन जान निकल जायेगी।

 ये सजी सजाई काया मिट्टी में मिल जायेगी।

 मुक्ति का एक रास्ता प्रभु का ही ध्यान था प्रभु का ही ध्यान था, 

आज भी है और कल भी रहेगा।


सृष्टि से पहले अमर ओ३म् नाम था, अमर ओ३म् नाम था,

 आज भी है और कल भी रहेगा।



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