प्रभु नाम के साबुन से जो, मन का मैल छुड़ाएगा। निर्मल मन के दर्पण में वह, प्रभु का दर्शन पाएगा॥
प्रभु नाम के साबुन से जो, मन का मैल छुड़ाएगा। निर्मल मन के दर्पण में वह, प्रभु का दर्शन पाएगा॥ नर शरीर अनमोल रे प्राणी, प्रभु कृपा से पाया है। झूठे जग प्रपंच में पड़ कर, क्यों प्रभु को बिसराया है। समय हाथ से निकल गया तो, समय हाथ से निकल गया तो, सिर धुन धुन पछताएगा। निर्मल मन के दर्पण में वह, प्रभु का दर्शन पाएगा॥ झूठ कपट निंदा को त्यागो, हर प्राणी से प्यार करो। घर पर आये अतिथि कोई तो, यथाशक्ति सत्कार करो। क्यों, पता नहीं किस रूप में आकर, पता नहीं किस रूप में आकर, नारायण मिल जाएगा। निर्मल मन के दर्पण में वह, प्रभु का दर्शन पाएगा॥ साधन तेरा कच्चा है, जब तक प्रभु पर विश्वास नहीं, मंजिल कर पाना है क्या, जब दीपक में प्रकाश नहीं। निश्चय है तो भवसागर से, निश्चय है तो भवसागर से, बेड़ा पार हो जाएगा। निर्मल मन के दर्पण में वह, प्रभु का दर्शन पाएगा॥ दौलत का अभिमान है झूठा, यह तो आनी जानी है। राजा रंक अनेक हुए, कितनों की सुनी कहानी है। ॐ नाम प्रिय महामंत्र ही, ॐ नाम प्रिय महामंत्र ही, साथ तुम्हारे जाएगा। निर्मल मन के दर्पण में वह, प्रभ...