वर्तमान समय में आर्य समाज का उद्देश्य क्या है?

 वर्तमान समय में आर्य समाज का उद्देश्य वही है जो महर्षि दयानन्द सरस्वती ने 1875 में रखा था, पर उसके रूप आज की समस्याओं के अनुसार अधिक प्रासंगिक हो गए हैं।


आर्य समाज कोई नया मत या पंथ नहीं है, यह वेदों के आधार पर समाज सुधार का आंदोलन है।

आर्य समाज के 10 नियमों पर आधारित वर्तमान के 5 मुख्य उद्देश्य

1. वेदों का प्रचार और पाखंड का खंडन -

आज भी मुख्य उद्देश्य अंधविश्वास, पाखंड, मूर्तिपूजा, फलित ज्योतिष, जातिवाद और चमत्कार के नाम पर हो रहे शोषण को वेद, तर्क और विज्ञान के प्रकाश में दूर करना है।


2. सामाजिक समानता और जाति-भेद का नाश -

जन्म से नहीं, कर्म और गुण से वर्ण व्यवस्था मानना। इसी उद्देश्य से अंतर्जातीय विवाह, विधवा विवाह, और दलित-वंचित वर्ग को यज्ञोपवीत देकर मुख्यधारा में लाने का कार्य आर्य समाज आज भी कर रहा है।


3. शिक्षा और चरित्र निर्माण -

DAV स्कूल-कॉलेज, गुरुकुल, कन्या गुरुकुल के माध्यम से आधुनिक शिक्षा के साथ वैदिक संस्कार देना। आज के समय में नशा, मोबाइल की लत और संस्कारहीनता के विरुद्ध युवाओं में चरित्र-निर्माण इसका बड़ा उद्देश्य है।


4. राष्ट्रभक्ति और हिंदी / स्वदेशी का प्रचार -

स्वामी दयानंद का नारा था - स्वराज्य, स्वदेशी, स्वभाषा। आज आर्य समाज गौ-रक्षा, पर्यावरण रक्षा (वैदिक यज्ञों द्वारा), हिंदी और संस्कृत के प्रचार, और राष्ट्रीय एकता के लिए कार्य करता है।


5. सच्चे धर्म का प्रचार -

कृण्वन्तो विश्वमार्यम् - सारे संसार को श्रेष्ठ (आर्य) बनाओ। अर्थात सभी मनुष्यों में सत्य, न्याय, दया, परोपकार जैसे मानवीय गुणों की स्थापना करना। धर्मांतरण के विरुद्ध शुद्धि आंदोलन और मानव सेवा इसी का भाग है।


संक्षेप में कहें तो आज के समय में आर्य समाज का उद्देश्य है - मनुष्य को मनुष्य बनाना। वेद के अनुसार चलकर एक ऐसा समाज बनाना जहाँ जाति नहीं, गुण की पूजा हो, गरीब-अमीर का भेद न हो, और हर व्यक्ति शारीरिक, आत्मिक और सामाजिक उन्नति कर सके।

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