आर्य समाज के मंत्री की जिम्मेदारियां*

नमस्ते जी  *आर्य समाज के मंत्री की जिम्मेदारियां*  आर्य समाज में मंत्री का पद बहुत महत्वपूर्ण होता है। मंत्री ही पूरी सभा की कार्य-प्रणाली को चलाता है।  आर्य समाज नियमों के अनुसार मंत्री की मुख्य जिम्मेदारियां ये हैं: *1. प्रशासनिक जिम्मेदारियां* - *सभा की बैठकें बुलाना*: साप्ताहिक, मासिक और वार्षिक बैठक की सूचना देना, एजेंडा बनाना और कार्यवाही लिखना - *रिकॉर्ड रखना*: सदस्यता रजिस्टर, बैठक की कार्यवाही, आय-व्यय का हिसाब, पत्र-व्यवहार का पूरा लेखा-जोखा रखना - *नियमों का पालन करवाना*: आर्य समाज के 10 नियमों और उप-नियमों के अनुसार सभा को चलाना *2. धार्मिक और प्रचार की जिम्मेदारियां* - *वैदिक प्रचार*: वेद, सत्यार्थ प्रकाश और ऋषि दयानंद के सिद्धांतों का प्रचार करना - *यज्ञ-हवन करवाना*: रोजाना संध्या-हवन, पूर्णिमा यज्ञ, संस्कार आदि की व्यवस्था करना - *संस्कार संपन्न करवाना*: नामकरण, विवाह, उपनयन आदि 16 संस्कारों को वैदिक विधि से करवाना - *व्याख्यान और सत्संग*: सप्ताह में प्रवचन, कक्षा और वैदिक पाठशाला की व्यवस्था करना *3. आर्थिक जिम्मेदारियां* - *चंदा और दान एकत्र करना*: समाज क...

आर्य समाज में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया बहुत ही सरल और वैदिक परंपराओं के अनुसार होती है।

 



आर्य समाज में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया बहुत ही सरल और वैदिक परंपराओं के अनुसार होती है। यहाँ कुछ मुख्य बातें हैं 


मृतक को स्नान कराना 

मृतक को गंगाजल या स्वच्छ जल से स्नान कराया जाता है।


- *वस्त्र पहनाना*: मृतक को स्वच्छ वस्त्र पहनाए जाते हैं।

- *अर्थी पर रखना*: मृतक को बांस की अर्थी पर लिटाया जाता है और सफेद वस्त्र से ढक दिया जाता है।


- *मंत्र उच्चारण*: आर्य समाज के लोग वेदों के आधार पर मंत्र उच्चारण करते हुए समसान घाट पर जाते हैं।

- *दाह संस्कार*: मृतक का दाह संस्कार किया जाता है।

और साथ में सुगन्धित सामग्री से वेद मंत्रों द्वारा आहुति भी दी जाती है।


- *अस्थियां एकत्रित करना*: दाह संस्कार के बाद अस्थियों को एकत्रित किया जाता है । 


- *श्राद्ध कर्म*: आर्य समाज में श्राद्ध कर्म नहीं किया जाता है, बल्कि जीवित रहते ही माता-पिता और गुरुओं की सेवा करना ही सच्ची श्रद्धा माना जाता है।


आर्य समाज के अनुसार, मृत्यु के बाद शोक मनाने के बजाय जितनी जल्दी हो सके सामान्य जीवन में लौट जाना चाहिए। इसीलिए आर्य समाज में तीसरे दिन ही शांति पाठ सम्पन्न करा दिया जाता है।

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