मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया

 मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया देने वाले ने दिया, वो भी दिया किस शान से मेरा है ये लेने वाला, कह उठा अभिमान से मैं - मेरा यह कहने वाला, मन किसी का है दिया मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया जो मिला है वो हमेशा, पास रह सकता नहीं कब बिछुड़ जाये ये कोई, राज कह सकता नहीं जिन्दगानी का खिला, मधुवन किसी का है दिया मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया जग की सेवा, खोज अपनी, प्रीति उनसे कीजिये जिन्दगी का राज है ये, जान कर जी लीजिये साधना की राह पर, साधन किसी का है दिया मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया

शुभ विवाह की वर्षगांठ पर, सौ-सौ बार बधाई हो।


 शुभ विवाह की वर्षगांठ पर, सौ-सौ बार बधाई हो।

शुभ विवाह की वर्षगांठ पर,
सौ-सौ बार बधाई हो।
सदा रहो तुम मिलकर ऐसे,
जैसे दूध मलाई हो।

तुमने जीवन साथी बनकर
इतने वर्ष बिताये हैं।
इक-दूजे का हाथ पकड़कर
इस मंजिल तक आये हैं।
आपस की यह प्रीति हमेशा,
हर दिन रात सवाई हो।
सदा रहो मिलकर तुम ऐसे,
जैसे दूध……… (1)

यह आदर्श जीवन तुम्हारा
सबको राह दिखाता है।
सद्-गृहस्थ ऐसा होता है
यह सन्देश सुनाता है।
तन-मन-धन से जन-गण-
मन की सेवा और भलाई हो।
सदा रहो मिलकर तुम ऐसे,
जैसे दूध…….. (2)

पति-पत्नी दो पहिये समझो,
अपने घर की गाड़ी के
दोनों ही माली हैं सुन्दर,
फूलों की फुलवारी के।
जीवन स्वर्ग बने धरती पर,
ऐसी नेक कमाई हो।
सदा रहो मिलकर तुम ऐसे,
जैसे दूध………. (3)

सुखद स्वास्थ्य का तुम दोनों के,
जीवन को आधार मिले
बीते समय प्रभु भक्ति में,
परमेश्वर का प्यार मिले
‘पथिक’ चलो सुख की राहों पर,
ईश्वर सदा सहाई हो सदा रहो
तुम मिलकर ऐसे जैसे दूध मलाई हो
शुभ विवाह की वर्षगांठ पर
सौ-सौ बार बधाई हो।
सदा रहो मिलकर तुम ऐसे,
जैसे दूध………. (4)

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