ओम का जप और ध्यान
ओम का जप और ध्यान दोनों ही लाभकारी हैं, पर दोनों अलग-अलग स्तर पर काम करते हैं। एक को दूसरे से बेहतर कहना सही नहीं होगा, क्योंकि एक दूसरे की सीढ़ी है।
1. ओम का जप क्या करता है?
जप यानी ओम को आवाज के साथ, धीरे-धीरे या मन ही मन दोहराना।
कैसे काम करता है: यह मन को एक ही बिंदु पर बांध देता है। जब आप लगातार ओम बोलते हैं, तो दिमाग के बाकी हजार विचार अपने आप शांत होने लगते हैं।
लाभ:
• मन तुरंत शांत और स्थिर होता है, घबराहट और गुस्सा कम होता है • सांस की लय ठीक होती है, शरीर में कंपन से नर्वस सिस्टम रिलैक्स होता है • जिसका मन बहुत भटकता है, उसके लिए शुरुआत करने का सबसे आसान तरीका है
जप एक सक्रिय अभ्यास है, आप कुछ कर रहे हैं।
2. ओम का ध्यान क्या करता है?
ध्यान में आप ओम का जप बंद करके, सिर्फ ओम के अर्थ, उसके कंपन या उसके बाद बची हुई शांति पर टिक जाते हैं। यहाँ बोलना नहीं है, सिर्फ सुनना और होना है।
कैसे काम करता है: जप से मन जब तैयार हो जाता है, तब ध्यान में आप साक्षी बन जाते हैं।
लाभ:
• गहरे स्तर का तनाव, पुरानी थकान निकलती है • आत्म-बोध, एकाग्रता और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है • जप से जो शांति थोड़ी देर के लिए मिलती है, ध्यान से वही आपके स्वभाव में उतरने लगती है
ध्यान एक निष्क्रिय अवस्था है, आप कुछ कर नहीं रहे, बस *हैं*।
तो आपके लिए कौन ज्यादा लाभकारी है?
अगर मन बहुत अशांत रहता है, नींद ठीक नहीं है, या आप अभी शुरुआत कर रहे हैं - तो जप ज्यादा लाभकारी है।
अगर आप पहले से थोड़ा जप करते हैं और अब अंदर की स्थिरता, स्पष्टता चाहते हैं - तो ध्यान ज्यादा लाभकारी है।
हमारे यहाँ की परंपरा में सबसे उत्तम क्रम यही बताया गया है:
जप से ध्यान की ओर
10-15 मिनट ओम का जप करें - पहले थोड़ा ऊँची आवाज में, फिर धीरे, फिर मन में। उसके बाद 10 मिनट आँख बंद करके चुप बैठ जाएँ, कुछ भी दोहराएँ नहीं, सिर्फ उस गूँज को महसूस करें जो जप के बाद शरीर में बची है। यही ओम का असली ध्यान है।
अकेला जप आपको शांत करेगा, अकेला ध्यान मुश्किल लगेगा। दोनों साथ करेंगे तो जप आपका द्वार बनेगा और ध्यान आपका घर।
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