धन तेरा हुआ बर्बाद,अरे नादान क्यों पीता है।
*धुन : हम भूल गये रे हर बात...*
*धन तेरा हुआ बर्बाद,अरे नादान क्यों पीता है।*
*बुद्धि का बिगड़ा साज,अरे नादान क्यों पीता है।।टेक।।*
*तुझ से पहले भी अनेकों ही,इस मय सागर में डूब गये।*
*कितनों ने जीवन खो ही दिया,कितने फांसी पर झूल गये।।*
*तेरा तन था कभी फौलाद,अरे नादान क्यों पीता है।।१।।*
*हैं मात पिता बूढ़े तेरे,कभी उनकी तरफ देखा ही नहीं।*
*अन्दर ही अन्दर रोते हैं,सुख-दुख की कभी पूछा ही नहीं।।*
*कर माॅं के दूध को याद,अरे नादान को पीता है।।२।।*
*बेटी तेरी ये कहती है,मैंने जनम लिया क्यों इस घर में।*
*हे परमपिता क्यों भूल गये,क्यों भेज दिया है इस घर में।।*
*सुन बेटी की फरियाद,अरे नादान क्यों पीता है।।३।।*
*कोई पी न सका इस बोतल को,पर ये सब को पी जाती है।*
*जब बोतल ने पी तुझको लिया,तब याद प्रभु की आती है।।*
*'मूलचन्द' तू कर धन्यवाद,अरे नादान क्यों पीता है।।४।।*
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