ओम का जप और ध्यान

 ओम का जप और ध्यान दोनों ही लाभकारी हैं, पर दोनों अलग-अलग स्तर पर काम करते हैं। एक को दूसरे से बेहतर कहना सही नहीं होगा, क्योंकि एक दूसरे की सीढ़ी है। 1. ओम का जप क्या करता है? जप यानी ओम को आवाज के साथ, धीरे-धीरे या मन ही मन दोहराना। कैसे काम करता है: यह मन को एक ही बिंदु पर बांध देता है। जब आप लगातार ओम बोलते हैं, तो दिमाग के बाकी हजार विचार अपने आप शांत होने लगते हैं। लाभ: • मन तुरंत शांत और स्थिर होता है, घबराहट और गुस्सा कम होता है • सांस की लय ठीक होती है, शरीर में कंपन से नर्वस सिस्टम रिलैक्स होता है • जिसका मन बहुत भटकता है, उसके लिए शुरुआत करने का सबसे आसान तरीका है  जप एक सक्रिय अभ्यास है, आप कुछ कर रहे हैं। 2. ओम का ध्यान क्या करता है? ध्यान में आप ओम का जप बंद करके, सिर्फ ओम के अर्थ, उसके कंपन या उसके बाद बची हुई शांति पर टिक जाते हैं। यहाँ बोलना नहीं है, सिर्फ सुनना और होना है। कैसे काम करता है: जप से मन जब तैयार हो जाता है, तब ध्यान में आप साक्षी बन जाते हैं। लाभ: • गहरे स्तर का तनाव, पुरानी थकान निकलती है • आत्म-बोध, एकाग्रता और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है • ...

धन तेरा हुआ बर्बाद,अरे नादान क्यों पीता है।

 *धुन : हम भूल गये रे हर बात...*


*धन तेरा हुआ बर्बाद,अरे नादान क्यों पीता है।*

*बुद्धि का बिगड़ा साज,अरे नादान क्यों पीता है।।टेक।।*


*तुझ से पहले भी अनेकों ही,इस मय सागर में डूब गये।* 

*कितनों ने जीवन खो ही दिया,कितने फांसी पर झूल गये।।* 

*तेरा तन था कभी फौलाद,अरे नादान क्यों पीता है।।१।।* 


*हैं मात पिता बूढ़े तेरे,कभी उनकी तरफ देखा ही नहीं।* 

*अन्दर ही अन्दर रोते हैं,सुख-दुख की कभी पूछा ही नहीं।।*

*कर माॅं के दूध को याद,अरे नादान को पीता है।।२।।* 


*बेटी तेरी ये कहती है,मैंने जनम लिया क्यों इस घर में।* 

*हे परमपिता क्यों भूल गये,क्यों भेज दिया है इस घर में।।* 

*सुन बेटी की फरियाद,अरे नादान क्यों पीता है।।३।।* 


*कोई पी न सका इस बोतल को,पर ये सब को पी जाती है।*

*जब बोतल ने पी तुझको लिया,तब याद प्रभु की आती है।।* 

*'मूलचन्द' तू कर धन्यवाद,अरे नादान क्यों पीता है।।४।।*

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