प्रभु सारी दुनियाँ से ऊँची तेरी शान है। कितना महान् है तू कितना महान् है।

 ईश महिमा प्रभु सारी दुनियाँ से ऊँची तेरी शान है।  कितना महान् है तू कितना महान् है। यहाँ वहाँ कोने-कोने तू ही मशहूर है।  निकट से निकट और दूर से भी दूर है।  'तुझमें समाया हुआ सकल जहान है।' कितना महान् है तू कितना महान् है ...... तू ही एक मालिक है सारी कायनात का।  फूलों भरी क्यारियों का तारों की जमात का।  तेरी ही जमीन है यह तेरा आसमान है। कितना महान् है तू कितना महान् है. सबने जो रंक देखे सभी तेरे रंग हैं।  जग में अनेक तेरे पालने के ढंग हैं।  तुझको तो छोटे-बड़े सबका ही ध्यान है। कितना महान् है तू कितना महान् है. जितने भी दुनियाँ में जीव देहधारी हैं।  सभी तेरे प्यार के समान अधिकारी हैं।  'पथिक' सभी को दिया तूने वरदान है। कितना महान् है तू कितना महान् है

आदि करूँ - शुभ कर्मों का मैं लेकर तेरा नाम सदा



आदि करूँ - शुभ कर्मों का 

मैं लेकर तेरा नाम सदा 


अपने संकल्पों से पहले 

तेरा नाम लिया मैंने 

तेरी अनुमति पाने को ही 

तेरा स्मरण किया मैंने 

आदि करूँ - शुभ कर्मों का 

मैं लेकर तेरा नाम सदा 


जीत-हार होती जो होवे  

मन में यह सन्तोष रहे 

तूने जो आदेश दिया प्रभु !

वही किया परितोष रहे 

आदि करूँ - शुभ कर्मों का 

मैं लेकर तेरा नाम सदा 


तुझे समर्पित रही जिन्दगी 

स्वयं सदा निष्काम रहा 

रहा न मेरा कुछ भी अपना 

तेरा पावन नाम रहा 

आदि करूँ - शुभ कर्मों का 

मैं लेकर तेरा नाम सदा 


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