प्रभु सारी दुनियाँ से ऊँची तेरी शान है। कितना महान् है तू कितना महान् है।

 ईश महिमा प्रभु सारी दुनियाँ से ऊँची तेरी शान है।  कितना महान् है तू कितना महान् है। यहाँ वहाँ कोने-कोने तू ही मशहूर है।  निकट से निकट और दूर से भी दूर है।  'तुझमें समाया हुआ सकल जहान है।' कितना महान् है तू कितना महान् है ...... तू ही एक मालिक है सारी कायनात का।  फूलों भरी क्यारियों का तारों की जमात का।  तेरी ही जमीन है यह तेरा आसमान है। कितना महान् है तू कितना महान् है. सबने जो रंक देखे सभी तेरे रंग हैं।  जग में अनेक तेरे पालने के ढंग हैं।  तुझको तो छोटे-बड़े सबका ही ध्यान है। कितना महान् है तू कितना महान् है. जितने भी दुनियाँ में जीव देहधारी हैं।  सभी तेरे प्यार के समान अधिकारी हैं।  'पथिक' सभी को दिया तूने वरदान है। कितना महान् है तू कितना महान् है

विधिवत पूजन करें शंकर का, आओ मिलकर सावन में,


विधिवत पूजन करें शंकर का, आओ मिलकर सावन में,

वेद ज्ञान की कावड लायें, घर-घर मंदिर आँगन में..


परमेश्वर के शिव स्वरूप का हमको दर्शन करना है,

महादेव देवों के देव का, वंदन अर्चन करना है;

सोचे कैसे चलती सृष्टि, उसके नियम प्रशासन में..


वेद के अंदर पूर्ण सृष्टि के पूर्ण रहस्य समायें हैं,

पढ़े - पढ़ायें सभी वेद को, शिव आदेश बतायें हैं;

प्रसन्न होता है भोला शंकर, वेद के पठन व पाठन में..


ईश् उपासना यज्ञ हवन को, जो प्रतिदिन अपनाते हैं,

मात-पिता गुरु वृद्ध जनों की, सेवा करते जाते है;

उनकी रुचि बढ़ती जाती, धर्म आचरण पालन में...


सुखदायी 'हित'कारी कामना, सारी पूरी कर देगा,

आधि-व्याधि जो तुझे सताती, सारी तेरी हर लेगा..

अब तू छोड़ भटकना भज ले, ओमकार निज प्राणन् में ..

वेद ज्ञान की कावड लायें, घर-घर मंदिर आँगन में..


तर्ज़: ओम नाम के हीरे-मोती मैं बिखराऊं

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