विषय=परमात्मा के अतिरिक्त किसी अन्य को परमात्मा का प्रतीक मान लेना ,उसको पूजना मूर्खता है?*

 *"मूर्खस्य नास्ति औषधम्*" *विषय=परमात्मा के अतिरिक्त किसी अन्य को परमात्मा का प्रतीक मान लेना ,उसको पूजना मूर्खता है?* मित्रों, आजकल भक्ति का एक नया दौर चल रहा है,लगभग  50 साल पूर्व इस प्रकार को  शुरुआत ओशो ने की और तरह तरह के संगीत के साथ नाचने को  ध्यान ,भक्ति का नाम दिया। इसी कड़ी में आगे जुड़ गए इस्कॉन ,इन्होंने कृष्ण कृष्ण की धुनों के साथ उछल कूद को ही असली भक्ति,ईश्वर उपासना , प्रार्थना करार दे दिया । फिर श्री श्री 1008 रविशंकर और अन्य धर्मगुरु क्यों पीछे रहते , उन्होंने भी गोपाला गोपाला ,राधे राधे आदि की संगीत की धुनों पर  नाचने के लिए प्रेरित किया ,इसको भक्ति बता दिया स्वयं भी मैदान में आकर भक्तों का उत्साहवर्धन किया। राधा कृष्ण के नाच गाने वालों का तो कहना ही क्या अनगिनत है।आजकल भागवत कथा सुनाने वाले पंडित भी कथा के बीच में महिला  श्रोताओं के नाचने का आनंद लेते है। मुस्लिम समाज में भी ,खासतौर पर सूफी संगीत भी जोर जोर से सिर हिलाने ,बालों को बिखेरकर उछाल कूद को भक्ति कहते   है, जिसमें हिंदू भी अल्ला हु अल्ला हु पर नाचते हैं। इसके अलावा मा...

हो जायें बन्द आँखें प्रभु ध्यान करते करते

 🙏 *आज का वैदिक भजन* 🙏 00123  

ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् 

ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् 


हो जायें बन्द आँखें 

प्रभु ध्यान करते करते 

अमृत बहाये वाणी 

गुण गान करते करते


हो जायें बन्द आँखें 

प्रभु ध्यान करते करते 

ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् 

ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् 


अपना मैं आप खो दूँ 

तन की भी सुध रहे ना 

हृदय रिझायें प्रभु को 

मधु पान करते करते 


हो जायें बन्द आँखें 

प्रभु ध्यान करते करते 

ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् 

ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् 


सत्य भाव की तरंगे 

अन्तराल से निकले 

हो जायें मौन मन भी 

तेरा मान करते करते 


हो जायें बन्द आँखें 

प्रभु ध्यान करते करते 

ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् 

ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् 


चित्त में रहे स्मृति 

प्रभु नाम की रटन हो 

हर्षाये मेरा अङ्ग अङ्ग 

नव ज्ञान भरते भरते 


हो जायें बन्द आँखें 

प्रभु ध्यान करते करते 

ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् 

ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् ओ३म् 


दिव्य ज्योति हो निराली 

ब्रह्म घाम हो घर मेरा 

जब जायें प्राण तन से 

प्रभु नाम रटते रटते 


हो जायें बन्द आँखें 

प्रभु ध्यान करते करते 

अमृत बहाये वाणी 

गुण गान करते करते


हो जायें बन्द आँखें 

प्रभु ध्यान करते करते

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

आर्य समाज में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया बहुत ही सरल और वैदिक परंपराओं के अनुसार होती है।

शुभ विवाह की वर्षगांठ पर, सौ-सौ बार बधाई हो।

प्रभु जी इतनी सी दया कर दो, हमको भी तुम्हारा प्यार मिले

वैदिक संस्कृति बनाम बाज़ार संस्कृति

धर्म किसे कहते है ? क्या हिन्दू, इस्लाम, आदि धर्म है?