मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया

 मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया देने वाले ने दिया, वो भी दिया किस शान से मेरा है ये लेने वाला, कह उठा अभिमान से मैं - मेरा यह कहने वाला, मन किसी का है दिया मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया जो मिला है वो हमेशा, पास रह सकता नहीं कब बिछुड़ जाये ये कोई, राज कह सकता नहीं जिन्दगानी का खिला, मधुवन किसी का है दिया मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया जग की सेवा, खोज अपनी, प्रीति उनसे कीजिये जिन्दगी का राज है ये, जान कर जी लीजिये साधना की राह पर, साधन किसी का है दिया मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया

तेरे दर को छोड़ कर, किस दर जाऊँ मैं सुनता मेरी कौन है, किसे सुनाऊँ मैं

 *आज का वैदिक भजन*

तेरे दर को छोड़ कर,
किस दर जाऊँ मैं
सुनता मेरी कौन है,
किसे सुनाऊँ मैं

याद भुलाई तेरी जब से,
लाखों कष्ट उठाये हैं
क्या जानूँ जीवन में मैंने,
कितने पाप कमाये हैं
हूँ शर्मिन्दा आपसे,
क्या बतलाऊँ मैं
तेरे दर को छोड़ कर,
किस दर जाऊँ मैं

मेरे पाप कर्म ही तुझसे,
प्रीति न करने देते हैं
कभी जो चाहूँ मिलूँ आपसे,
रोक मुझे ये देते हैं
कैसे स्वामी आपके
दर्शन पाऊँ मैं
तेरे दर को छोड़ कर,
किस दर जाऊँ मैं

तू है नाथ वरों का दाता,
तुझसे वर सब पाते हैं
ऋषि मुनि और योगी सारे,
तेरे ही गुण गाते हैं
छींटा दे दो ज्ञान का,
होश में आऊँ मैं
तेरे दर को छोड़ कर,
किस दर जाऊँ मैं

जो बीती सो बीती लेकिन,
बाकी उमर सम्भालूँ मैं
प्रेम पाश में बन्धा आपके,
गीत प्रेम के गा लूँ मैं
जीवन अपने आप का,
सफल बना लूँ मैं 
सुनता मेरी कौन है,
किसे सुनाऊँ मैं
तेरे दर को छोड़ कर,
किस दर जाऊँ मैं

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