दुनिया बनाने वाले, महिमा तेरी निराली चन्दा बनाया शीतल, सूरज में आग डाली

 *आज का वैदिक भजन* दुनिया बनाने वाले, महिमा तेरी निराली चन्दा बनाया शीतल, सूरज में आग डाली ऊँचे शिखर गिरी के, आकाश चूमते हैं वृक्षों के झुरमुटे भी, वायु में झूमते हैं सरिताऐं बहती कल-कल, निर्मल से नीर वाली चन्दा बनाया शीतल, सूरज में आग डाली दुनिया बनाने वाले फूलों का चूस कर रस, कैसा मधु बनाये मधुमक्खी में भी तूने, क्या यंत्र है लगाये मधु सबके मन को भाये, लाला हो चाहे लाली चन्दा बनाया शीतल, सूरज में आग डाली दुनिया बनाने वाले पत्तों को खा के कीड़ा, रेशम बना रहा है है कौन जो उदर में, चरखा चला रहा है बुन-बुन के आ रहा है, रेशम का लच्छा जाली चन्दा बनाया शीतल, सूरज में आग डाली दुनिया बनाने वाले बरसात के दिनों में, लेंटर टपकते देखा बयें के घोंसले में, पायी न जल की रेखा क्या तकनीकी सिखाई, तूने ओ जग के वाली चन्दा बनाया शीतल, सूरज में आग डाली दुनिया बनाने वाले जुगनू की दुम में तूने, क्या बल्ब है लगाया बरसात की निशा में, जंगल है जगमगाया पक्षी चकोर के क्या, आँखों में कशिश डाली चन्दा बनाया शीतल, सूरज में आग डाली दुनिया बनाने वाले मोरों के पंख देखो, क्या विचित्र चित्रकारी कोयल बनाई काली, आवाज प्या...

तेरे दर को छोड़ कर, किस दर जाऊँ मैं सुनता मेरी कौन है, किसे सुनाऊँ मैं

 *आज का वैदिक भजन*

तेरे दर को छोड़ कर,
किस दर जाऊँ मैं
सुनता मेरी कौन है,
किसे सुनाऊँ मैं

याद भुलाई तेरी जब से,
लाखों कष्ट उठाये हैं
क्या जानूँ जीवन में मैंने,
कितने पाप कमाये हैं
हूँ शर्मिन्दा आपसे,
क्या बतलाऊँ मैं
तेरे दर को छोड़ कर,
किस दर जाऊँ मैं

मेरे पाप कर्म ही तुझसे,
प्रीति न करने देते हैं
कभी जो चाहूँ मिलूँ आपसे,
रोक मुझे ये देते हैं
कैसे स्वामी आपके
दर्शन पाऊँ मैं
तेरे दर को छोड़ कर,
किस दर जाऊँ मैं

तू है नाथ वरों का दाता,
तुझसे वर सब पाते हैं
ऋषि मुनि और योगी सारे,
तेरे ही गुण गाते हैं
छींटा दे दो ज्ञान का,
होश में आऊँ मैं
तेरे दर को छोड़ कर,
किस दर जाऊँ मैं

जो बीती सो बीती लेकिन,
बाकी उमर सम्भालूँ मैं
प्रेम पाश में बन्धा आपके,
गीत प्रेम के गा लूँ मैं
जीवन अपने आप का,
सफल बना लूँ मैं 
सुनता मेरी कौन है,
किसे सुनाऊँ मैं
तेरे दर को छोड़ कर,
किस दर जाऊँ मैं

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