जो वस्तु जैसा है – उसे ठीक वैसा जानना, मानना, कहना ही धर्म है | मैंने आप लोगों के प्रायः विचारों को देखा है, सबने अपनी मनमानी बाते की हैं, जो सत्य से कोसो दूर हैं उसमे भी कोई पुलिस की धमकी दी है किसी ने, और किसी ने सिन्धु सभ्यता की बाते की है, और किसी ने आर्य समाज को अपना दुश्मन लिखा है | मेरा जवाब सबको है पुलिस किसी के व्यक्तिगत नहीं होते, पुलिस सत्य के लिए काम करती है | कौआ कान ले गया वाली बातों को पुलिस नहीं मानेगी | पहली बात, दूसरी बात पुरातत्व विभाग की इन्हें आधातत्व का पता नहीं पूरातत्व क्या जानेंगे ? इनको पता नही जो यह मानते हैं, वैदिक काल से पहले, सिन्धु सभ्यता थी ? उसे सृष्टि विज्ञान का क- ख का ज्ञान नहीं है ? सृष्टि कहाँ हुई कैसे हुई मनुष्य की उत्पत्ति कैसी हुई, वह काल कौन सा था ? उस काल का नाम क्या था ? इससे यह लोग कोसों दूर हैं | मानव किसे कहते हैं इसकी जानकारी इन सबको नही है | शास्त्र का कहना है मानव वह है- मत्वा कर्मणि सिव्ते, अर्थात मानव वह हैं जो विचारशील, मननशील, बुद्धिमान, अकल से काम ले वह मानव कहलाता है | अब देखें यह जितने भी मजहब वाले हैं, हिन्दू, मुस्लिम...
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