दुनिया बनाने वाले, महिमा तेरी निराली चन्दा बनाया शीतल, सूरज में आग डाली
*आज का वैदिक भजन*
दुनिया बनाने वाले, महिमा तेरी निरालीचन्दा बनाया शीतल, सूरज में आग डाली
ऊँचे शिखर गिरी के, आकाश चूमते हैं
वृक्षों के झुरमुटे भी, वायु में झूमते हैं
सरिताऐं बहती कल-कल, निर्मल से नीर वाली
चन्दा बनाया शीतल, सूरज में आग डाली
दुनिया बनाने वाले
फूलों का चूस कर रस, कैसा मधु बनाये
मधुमक्खी में भी तूने, क्या यंत्र है लगाये
मधु सबके मन को भाये, लाला हो चाहे लाली
चन्दा बनाया शीतल, सूरज में आग डाली
दुनिया बनाने वाले
पत्तों को खा के कीड़ा, रेशम बना रहा है
है कौन जो उदर में, चरखा चला रहा है
बुन-बुन के आ रहा है, रेशम का लच्छा जाली
चन्दा बनाया शीतल, सूरज में आग डाली
दुनिया बनाने वाले
बरसात के दिनों में, लेंटर टपकते देखा
बयें के घोंसले में, पायी न जल की रेखा
क्या तकनीकी सिखाई, तूने ओ जग के वाली
चन्दा बनाया शीतल, सूरज में आग डाली
दुनिया बनाने वाले
जुगनू की दुम में तूने, क्या बल्ब है लगाया
बरसात की निशा में, जंगल है जगमगाया
पक्षी चकोर के क्या, आँखों में कशिश डाली
चन्दा बनाया शीतल, सूरज में आग डाली
दुनिया बनाने वाले
मोरों के पंख देखो, क्या विचित्र चित्रकारी
कोयल बनाई काली, आवाज प्यारी-प्यारी
बिजली की चमक कैसी, घन की घटा है काली
चन्दा बनाया शीतल, सूरज ने आग डाली
दुनिया बनाने वाले
बच्चे किसी के दर्जन, टुकड़ों के भी हैं लाले
सन्तान बिन किसी के, घर में लगे हैं ताले
जीवों के कर्म फल की, तेरे हाथ में है ताली
चन्दा बनाया शीतल, सूरज ने आग डाली
दुनिया बनाने वाले
माता पिता विधाता, बन्धु सखा व भ्राता
महिमा का "पथिक" तेरी, किसी को न भेद पाता
तेरे दर पे आये दाता, लेकर के झोली खाली
चन्दा बनाया शीतल, सूरज ने आग डाली
दुनिया बनाने वाले, महिमा तेरी निराली
चन्दा बनाया शीतल, सूरज में आग डाली
दुनिया बनाने वाले
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