मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया

 मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया देने वाले ने दिया, वो भी दिया किस शान से मेरा है ये लेने वाला, कह उठा अभिमान से मैं - मेरा यह कहने वाला, मन किसी का है दिया मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया जो मिला है वो हमेशा, पास रह सकता नहीं कब बिछुड़ जाये ये कोई, राज कह सकता नहीं जिन्दगानी का खिला, मधुवन किसी का है दिया मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया जग की सेवा, खोज अपनी, प्रीति उनसे कीजिये जिन्दगी का राज है ये, जान कर जी लीजिये साधना की राह पर, साधन किसी का है दिया मैं नहीं, मेरा नहीं, ये तन किसी का है दिया जो भी अपने पास है, वो धन किसी का है दिया

तेरे नाम का सुमिरन करके, मेरे मन में सुख भर आया तेरी कृपा को मैंने पाया, तेरी दया को मैंने पाया

 तेरे नाम का सुमिरन करके,

मेरे मन में सुख भर आया
तेरी कृपा को मैंने पाया,
तेरी दया को मैंने पाया

दुनियाँ की ठोकर खाके,
जब हुआ कभी बेसहारा
ना पाके अपना कोई,
जब मैंने तुझे पुकारा
हे नाथ!! मेरे सिर ऊपर,
तूने अमृत बरसाया
तेरी कृपा को मैंने पाया,
तेरी दया को मैंने पाया

तू सँग में था नित मेरे,
ये नयना देख न पाए
चंचल माया के रँग में,
ये नयन रहे उलझाये
जितनी भी बार गिरा हूँ,
तूने पग-पग मुझे उठाया
तेरी कृपा को मैंने पाया,
तेरी दया को मैंने पाया

भवसागर की लहरों ने,
भटकाई मेरी नैया
तट छूना भी मुश्किल था,
नहीं दीखे कोई खिवैया
तू लहर का रूप पहन कर,
मेरी नाव किनारे लाया
तेरी कृपा को मैंने पाया,
तेरी दया को मैंने पाया

हर तरफ तुम्हीं हो मेरे,
हर तरफ तेरा उजियारा
निर्लेप रमैया मेरे,
हर रूप तुम्हीं ने धारा
हो शरण तेरी हे दाता,
तेरा तुझ ही को चढ़ाया
तेरी कृपा को मैंने पाया,
तेरी दया को मैंने पाया

तेरे नाम का सुमिरन करके,
मेरे मन में सुख भर आया
तेरी कृपा को मैंने पाया,
तेरी दया को मैंने पाया

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