प्रभु सारी दुनियाँ से ऊँची तेरी शान है। कितना महान् है तू कितना महान् है।

 ईश महिमा प्रभु सारी दुनियाँ से ऊँची तेरी शान है।  कितना महान् है तू कितना महान् है। यहाँ वहाँ कोने-कोने तू ही मशहूर है।  निकट से निकट और दूर से भी दूर है।  'तुझमें समाया हुआ सकल जहान है।' कितना महान् है तू कितना महान् है ...... तू ही एक मालिक है सारी कायनात का।  फूलों भरी क्यारियों का तारों की जमात का।  तेरी ही जमीन है यह तेरा आसमान है। कितना महान् है तू कितना महान् है. सबने जो रंक देखे सभी तेरे रंग हैं।  जग में अनेक तेरे पालने के ढंग हैं।  तुझको तो छोटे-बड़े सबका ही ध्यान है। कितना महान् है तू कितना महान् है. जितने भी दुनियाँ में जीव देहधारी हैं।  सभी तेरे प्यार के समान अधिकारी हैं।  'पथिक' सभी को दिया तूने वरदान है। कितना महान् है तू कितना महान् है

शुभ विवाह की वर्षगांठ पर, सौ-सौ बार बधाई हो।


शुभ विवाह की वर्षगांठ


शुभ विवाह की वर्षगांठ पर, सौ-सौ बार बधाई हो।

 सदा रहो तुम मिलकर ऐसे, जैसे दूध मलाई हो। 


तुमने जीवन साथी बनकर इतने वर्ष बिताये हैं। 

इक-दूजे का हाथ पकड़कर इस मंजिल तक आये हैं।

आपस की यह प्रीति हमेशा, हर दिन रात सवाई हो।

सदा रहो मिलकर तुम ऐसे, जैसे दूध. (1)


यह आदर्श जीवन तुम्हारा सबको राह दिखाता है।

 सद्-गृहस्थ ऐसा होता है यह सन्देश सुनाता है।

 तन-मन-धन से जन-गण-मन की सेवा और भलाई हो।

सदा रहो मिलकर तुम ऐसे, जैसे दूध (2)


पति-पत्नी दो पहिये समझो, अपने घर की गाड़ी के 

दोनों ही माली हैं सुन्दर, फूलों की फुलवारी के।

जीवन स्वर्ग बने धरती पर, ऐसी नेक कमाई हो।

सदा रहो मिलकर तुम ऐसे, जैसे दूध (3)


सुखद स्वास्थ्य हो तुम दोनों के, जीवन को आधार मिले 

बीते समय प्रभु-भक्ति में, परमेश्वर का प्यार मिले

 'पथिक' चलो सुख की राहों पर, ईश्वर सदा सहाई हो 

सदा रहो तुम मिलकर ऐसे जैसे दूध मलाई हो


शुभ विवाह की वर्षगांठ पर सौ-सौ बार बधाई हो।

सदा रहो मिलकर तुम ऐसे, जैसे दूध ........ (4)

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