ईश्वर का शुक्रिया :- करने के लिए निम्नलिखित कारण है :-

*ईश्वर का शुक्रिया :- करने के लिए निम्नलिखित कारण है :-* 1. *टायर चलने पर घिसते हैं, लेकिन पैर के तलवे जीवनभर दौड़ने के बाद भी नए जैसे रहते हैं।*   2. *शरीर 75% पानी से बना है, फिर भी लाखों रोमकूपों के बावजूद एक बूंद भी लीक नहीं होती।*   3. *कोई भी वस्तु बिना सहारे नहीं खड़ी रह सकती, लेकिन यह शरीर खुद को संतुलित रखता है।*   4. *कोई बैटरी बिना चार्जिंग के नहीं चलती, लेकिन हृदय जन्म से लेकर मृत्यु तक बिना रुके धड़कता है।* 5. *कोई पंप हमेशा नहीं चल सकता, लेकिन रक्त पूरे जीवनभर बिना रुके शरीर में बहता रहता है।*   6. *दुनिया के सबसे महंगे कैमरे भी सीमित हैं, लेकिन आंखें हजारों मेगापिक्सल की गुणवत्ता में हर दृश्य कैद कर सकती हैं।*   7. *कोई लैब हर स्वाद टेस्ट नहीं कर सकती, लेकिन जीभ बिना किसी उपकरण के हजारों स्वाद पहचान सकती है।*   8. *सबसे एडवांस्ड सेंसर भी सीमित होते हैं, लेकिन त्वचा हर हल्की-से-हल्की संवेदना को महसूस कर सकती है।*   9. *कोई भी यंत्र हर ध्वनि नहीं निकाल सकता, लेकिन कंठ से हजारों फ्रीक्वेंसी की आवाजें पैदा ...

तेरी मेहरबानी का, है बोझ इतना जिसे मैं उठाने के, काबिल नहीं हूँ


तुम्हीं ने अता की मुझे जिन्दगानी
तेरी ही महिमा फिर भी न जानी
कर्जदार तेरी दया का हूँ इतना
जिसे मैं लौटाने के काबिल नहीं 

तेरी मेहरबानी का, है बोझ इतना
जिसे मैं उठाने के, काबिल नहीं हूँ
मैं आ तो गया हूँ, मगर जानता हूँ
तेरे दर पे आने के, काबिल नहीं हूँ
तेरी मेहरबानी का

ये माना कि दाता हो, तुम इस जहाँ के
मगर कैसे झोली फैलाऊँ मैं आ के
जो पहले दिया है वो, कुछ कम नहीं है
मैं ज्यादा उठाने के काबिल नहीं हूँ
तेरी मेहरबानी का, है बोझ इतना
जिसे मैं उठाने के, काबिल नहीं हूँ
तेरी मेहरबानी का

जमाने की चाहत ने, खुद को मिटाया
तेरा नाम हरगिज, जुबां पे न आया
शर्मसार हूँ मैं, गुनाहगार हूँ मैं,
तुझे मुँह दिखाने के, काबिल नहीं हूँ
तेरी मेहरबानी का


यहीं माँगता हूँ मैं, सिर को झुका लूँ
तेरा दीद इक बार, जी भर के पा लूँ
सिवा दिल के टुकड़े के, ऐ मेरे दाता
कुछ भी चढ़ाने के, काबिल नहीं हूँ
तेरी मेहरबानी का, है बोझ इतना
जिसे मैं उठाने के, काबिल नहीं हूँ
आ तो गया हूँ, मगर जानता हूँ
तेरे दर पे आने के, काबिल नहीं हूँ
तेरी मेहरबानी का

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